राजधानी भोपाल में सरकार के अहाते बंद करने के फैसले के बाद एक नई और गंभीर समस्या सामने आई है। अब शहर की प्रमुख सड़कें ही शराबियों के लिए बार बनती जा रही हैं। शराब दुकानों के बाहर गिलास, बोतलें, नमकीन के पाउच और खुलेआम पीते लोग एक आम दृश्य बन चुका है।

अहाते बंद हुए, सड़कें बन गईं ‘पार्टी ज़ोन’
सरकार ने 2023 में प्रदेशभर के शराब दुकानों से जुड़े अहाते (पीने के स्थान) बंद कर दिए थे। मंशा थी की शराब सार्वजनिक स्थानों पर नहीं पी जाये। लेकिन अब तस्वीर उलटी हो गई है। लोग अब दुकानों के बाहर ही ज़मीन पर बैठकर, सरेआम शराब का सेवन कर रहे हैं।
ज़मीनी हकीकत देखी जाए तो अप्सरा टॉकीज, सुभाष नगर, बरखेड़ा, पिपलानी, कस्तूरबा, कोलार रोड और होशंगाबाद रोड जैसे इलाकों में खुलेआम शराबखोरी देखी गई।
पुलिस के मौके पर पहुंचने पर लोगों में अफरा-तफरी मच गई, कुछ भागे, कुछ घरों में छुप गए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस बारे में डीजीपी कैलाश मकवाना ने कहा “इस पर आबकारी विभाग से जल्द बात करेंगे। सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
लेकिन अब सवाल उठता है की राजधानी में जहाँ आम नागरिक शांति, सुरक्षा और साफ़-सुथरे माहौल की अपेक्षा करता है, वहाँ यह सार्वजनिक शराबखोरी सिर्फ कानून व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाजिक अनुशासन की भी कड़ी परीक्षा बन चुकी है।
सरकार की नीति भले ही सही हो, लेकिन जब तक ज़मीन पर सख्ती नहीं होगी, तब तक सड़कें ऐसे ही मयखाने बनी रहेंगी।
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