भोपाल के बाहरी क्षेत्र सुखी सेवाणिया के पास गुरुवार देर रात एक बड़ा हादसा टल गया। इंदौर–जबलपुर बायपास का लगभग 100 मीटर लंबा हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे सड़क के बीचों-बीच लगभग 20 फीट गहरा और 30 फीट चौड़ा गड्ढा बन गया। हादसे के समय सड़क पर कोई वाहन नहीं था, अन्यथा यह घटना बड़ा रूप ले सकती थी।

स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ देर पहले तक वहां भारी वाहनों की आवाजाही हो रही थी। अचानक ज़मीन में कंपन महसूस हुआ और कुछ ही सेकंड में एप्रोच वॉल भरभराकर गिर गई। धंसान के बाद सड़क के दोनों ओर लंबा जाम लग गया। मौके पर पहुंची पुलिस और NHAI (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) की टीम ने तुरंत यातायात डायवर्ट किया और एरिया को पूरी तरह सील कर दिया।
इंजीनियरों ने प्राथमिक जांच में बताया कि पिछले कुछ दिनों से उस इलाके में बारिश और ज़मीन के नीचे जलभराव के कारण मिट्टी की पकड़ कमजोर हो गई थी, जिससे यह हादसा हुआ। इसके अलावा निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
घटना की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और NHAI के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि “यह एक गंभीर इंफ्रास्ट्रक्चर फेल्योर है। सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन इसकी जांच उच्च स्तरीय समिति करेगी।”
विशेषज्ञों के अनुसार, एप्रोच वॉल के धंसने का कारण या तो स्ट्रक्चरल डिज़ाइन की खामी, या फिर ड्रेनेज सिस्टम की विफलता हो सकता है। कई स्थानों पर सड़क के नीचे पानी रिसता हुआ पाया गया, जो धीरे-धीरे मिट्टी की पकड़ को कम करता गया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह बायपास हाल ही में मरम्मत किया गया था, फिर भी कुछ जगहों पर दरारें दिख रही थीं। लोगों ने NHAI और ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
राहत कार्य जारी, अगले 72 घंटे तक बंद रहेगा मार्ग
NHAI टीम ने धंसे हुए हिस्से के आसपास मिट्टी भरने और सड़क की स्थिरता जांचने का कार्य शुरू कर दिया है। फिलहाल इस मार्ग को अगले 72 घंटे तक पूरी तरह बंद रखा गया है। भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से मोड़ा जा रहा है।
भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने यात्रियों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से उस क्षेत्र में न जाएं और AIIMS रोड या बैरागढ़ बायपास का प्रयोग करें। यह घटना मध्य प्रदेश में चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय पर निगरानी और मेंटेनेंस न किया गया, तो ऐसी घटनाएँ भविष्य में जानलेवा साबित हो सकती हैं।
फिलहाल प्रशासन ने कहा है कि सड़क को दोबारा चालू करने से पहले स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाएगा ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोका जा सके।


