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एम्स भोपाल में 3 डी प्रिंटिंग से लौटी 52 मरीजों की मुस्कान: ब्लैक फंगस के बाद चेहरा गंवाने वालों को मिला नया जीवन

कोरोना काल में ब्लैक फंगस से बिगड़े चेहरे, अब 3डी तकनीक से हुआ पुनर्निर्माण

भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने एक बार फिर चिकित्सा जगत में मिसाल पेश की है। एम्स भोपाल की टीम ने 3डी प्रिंटिंग तकनीक की मदद से ब्लैक फंगस से प्रभावित 52 मरीजों के चेहरे का पुनर्निर्माण कर उनकी मुस्कान वापस लौटा दी है।
कोविड-19 के दौरान ब्लैक फंगस (म्यूकोरमायकोसिस) संक्रमण से कई मरीजों के चेहरे के हिस्से — जैसे नाक, जबड़ा, या आंख के आसपास की हड्डियाँ — क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इससे न केवल उनका चेहरा विकृत हो गया था बल्कि आत्मविश्वास भी पूरी तरह टूट गया था।
एम्स भोपाल की मैक्सिलोफेशियल सर्जरी टीम ने 3डी प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करके इन मरीजों के लिए कृत्रिम चेहरे के अंग तैयार किए, जो उनके चेहरे से बिल्कुल मेल खाते हैं। इस सफलता ने चिकित्सा क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई है।

डॉक्टरों की नवाचारपूर्ण टीम ने तैयार किए सटीक कृत्रिम अंग

एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने बताया कि 3डी तकनीक से सबसे पहले मरीज के चेहरे का डिजिटल स्कैन तैयार किया गया। फिर कंप्यूटर की मदद से उसी के अनुरूप नया हिस्सा डिजाइन किया गया।
इसके बाद 3डी प्रिंटर से उस हिस्से का मॉडल बनाया गया और फिर उसे सिलिकॉन या बायोकंपैटिबल मटेरियल से तैयार किया गया, जो त्वचा से मेल खाता है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह न केवल सटीक आकार और रंग देती है, बल्कि मरीज की चेहरे की बनावट के अनुसार बिल्कुल प्राकृतिक लगती है।
डॉक्टरों ने बताया कि इस प्रक्रिया में किसी बड़ी सर्जरी की जरूरत नहीं होती, जिससे संक्रमण का खतरा भी कम रहता है। मरीज कुछ ही दिनों में सामान्य जीवन जीने लगते हैं।

मरीजों की आंखों में खुशी, आत्मविश्वास लौटा

एम्स भोपाल के डॉक्टरों का कहना है कि इन 52 मरीजों में से अधिकांश वे हैं जिन्होंने ब्लैक फंगस के कारण अपना चेहरा या नाक का हिस्सा खो दिया था। कई महीनों तक वे घर से बाहर निकलने में झिझक महसूस करते थे, लेकिन अब वे आत्मविश्वास के साथ समाज में लौट रहे हैं।
एक महिला मरीज ने बताया कि बीमारी के बाद वह अपने चेहरे को देखकर टूट गई थी, लेकिन अब 3डी प्रिंटिंग की मदद से उसे नया चेहरा और नई पहचान मिली है।
डॉक्टरों ने यह भी बताया कि आने वाले समय में इस तकनीक को और उन्नत बनाया जाएगा ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिल सके।
एम्स प्रशासन ने इसे देश में चिकित्सा क्षेत्र की एक बड़ी उपलब्धि बताया है, जिसने प्लास्टिक सर्जरी और बायो-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नए द्वार खोल दिए हैं।

Sanjay
Author: Sanjay

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