विधायक बने बंदर’ पोस्टर से माहौल गरमाया
कटनी में हाल ही में हुई आगजनी की घटना ने राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। इसी बीच एक विवाद तब खड़ा हो गया जब एक स्थान पर “विधायक बने बंदर… हाथ में उस्तरा” लिखे पोस्टर देखे गए। इस पोस्टर ने स्थानीय नेताओं में नाराजगी पैदा कर दी। इसे लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर बयानबाजी तेज कर दी।
नेताओं ने कहा कि इस तरह के शब्द लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं और समाज में गलत संदेश देते हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में बहस का माहौल गर्म हो गया, और स्थानीय प्रशासन पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्थानों पर फैले ऐसे पोस्टरों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई। लोगों में यह भी चर्चा है कि इस तरह की अभद्र भाषा का उपयोग जनता को भड़काने का प्रयास हो सकता है, जिससे तनाव और बढ़ सकता है।
आगजनी मामले में कार्रवाई को बीजेपी ने बताया गलत, पुलिस को घेरा
आगजनी की घटना के बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर बीजेपी विधायकों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने बिना पूरी जांच किए कार्रवाई की, जिससे निर्दोष लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है। इसी विरोध में बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुलिस को घेरकर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है और पक्षपातपूर्ण रवैया दिखा रहा है। प्रदर्शन के दौरान कई बार माहौल तनावपूर्ण हुआ, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखा।
बीजेपी नेताओं ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और गिरफ्तार किए गए लोगों के साथ न्याय किया जाए। उनका कहना है कि वास्तविक आरोपियों को बचाया जा रहा है और मासूम लोगों को आरोपी बनाया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है।
विधानसभा में गूंजा मामला, कांग्रेस का वॉक-आउट
कटनी की इस घटना और उसके बाद की पुलिस कार्रवाई का मुद्दा विधानसभा तक पहुंच गया। सदन में इस पर गर्मागरम बहस हुई। कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह कानून-व्यवस्था संभालने में विफल हो रही है और प्रशासन को सही दिशा देने में असमर्थ है। जैसे-जैसे बहस तीखी होती गई, कांग्रेस विधायकों ने विरोध दर्ज कराते हुए सदन से वॉक-आउट कर दिया।
वहीं, सरकार का कहना है कि पुलिस ने कानून के मुताबिक कार्रवाई की है और किसी के साथ अन्याय नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए मामले को तूल दे रहे हैं। सदन में यह भी चर्चा हुई कि आगजनी की घटनाएँ जन शांति के लिए खतरा हैं और इन्हें रोकने के लिए सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए।


