इमरजेंसी सेवाओं में लापरवाही और उपकरणों की खराब स्थिति
भोपाल से आई स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण टीम ने शाजापुर जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिसमें अस्पताल की इमरजेंसी सेवाएँ सबसे अधिक चिंता का विषय रहीं। टीम ने पाया कि कुछ सकारात्मक बदलावों के बावजूद इमरजेंसी यूनिट अभी भी पूरी तरह मानकों पर खरी नहीं उतर रही है।
कई जरूरी उपकरण जैसे नेबुलाइज़र, मॉनिटरिंग मशीनें और बेड यूनिट या तो खराब थीं या उनका ठीक से रख-रखाव नहीं किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ आवश्यक दवाओं का स्टॉक पूरा नहीं था, जिससे गंभीर मरीजों के इलाज में देरी हो सकती है। टीम ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि अस्पताल का सबसे महत्वपूर्ण विभाग यदि इस हालत में रहेगा, तो बाकी सुधारों का कोई लाभ मरीजों तक नहीं पहुँच पाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि इमरजेंसी में उपकरणों की सूची तुरंत अपडेट की जाए और उनकी मरम्मत या बदलने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।
स्वच्छता व्यवस्था में असमानता, कई वार्डों में गंदगी के ढेर
निरीक्षण टीम ने अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था की भी गहन जांच की और पाया कि कुछ वॉर्डों में सफाई संतोषजनक थी, लेकिन कई स्थानों पर स्थिति बेहद खराब दिखाई दी। विशेष रूप से शौचालय, कॉरिडोर, महिला वार्ड और दवा भंडारण कक्ष में गंदगी, बदबू और धूल साफ नजर आई। अस्पताल परिसर में कचरे का सही तरीके से निस्तारण नहीं किया जा रहा था, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता था। टीम ने अस्पताल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी वार्डों की सफाई के लिए एक स्पष्ट ड्यूटी चार्ट बनाया जाए, कचरा निस्तारण की व्यवस्था को व्यवस्थित किया जाए और लगातार निगरानी रखी जाए। टीम ने यह भी सुझाव दिया कि स्वच्छता में सुधार दिखाने के लिए अस्पताल प्रशासन को हफ्तेभर के भीतर रिपोर्ट पेश करनी होगी।
दवा स्टॉक और रिकॉर्ड प्रबंधन में गड़बड़ियाँ, पारदर्शिता की कमी
अस्पताल के निरीक्षण के अंतिम चरण में टीम ने दवा स्टॉक, रजिस्टर और रिकॉर्ड प्रणाली की जांच की। उन्होंने पाया कि दवाओं का सही से रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा था और कई दवाएँ स्टॉक में होते हुए भी रजिस्टर में अपडेट नहीं थीं। कुछ अत्यावश्यक दवाएँ स्टॉक से नीचे थीं, जिसके कारण मरीजों को समय पर दवाएँ उपलब्ध नहीं हो पा रही थीं। टीम ने इसे अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि दवा वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि स्टॉक मैनेजमेंट सिस्टम को डिजिटल रूप से अपडेट किया जाए, रजिस्टर को प्रतिदिन चेक किया जाए और किसी भी दवा की कमी होने पर तुरंत रिपोर्ट तैयार की जाए। टीम ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समयावधि में इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण टीम का यह दौरा अस्पताल प्रबंधन के लिए एक चेतावनी और सुधार का अवसर दोनों लेकर आया है।


