हॉस्टल में फंदे पर मिला छात्र
भोपाल के एक निजी कॉलेज में पढ़ने वाले MBA छात्र की आत्महत्या ने शहर में सनसनी फैला दी है। छात्र अपने किराये के कमरे में फांसी पर लटका मिला, जिसके बाद दोस्तों ने तुरंत पुलिस और परिजनों को सूचना दी। बताया जा रहा है कि छात्र पिछले दो वर्षों से भोपाल में रहकर पढ़ाई कर रहा था और कॉलेज में उसकी छवि एक शांत व गंभीर विद्यार्थी की थी।
पुलिस के अनुसार कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और मौके पर किसी संघर्ष या जबरन प्रवेश के निशान नहीं मिले। प्राथमिक जांच में यह घटना आत्महत्या प्रतीत हो रही है, लेकिन कारण अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस ने कमरे से निजी सामान और छात्र की पढ़ाई से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। मोबाइल फोन को भी फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पता चल सके कि वह मानसिक रूप से किस स्थिति में था।
मां से हुई आखिरी बातचीत सामान्य
घटना से कुछ ही समय पहले छात्र ने अपनी मां से फोन पर बात की थी, जिसमें उसने बिल्कुल सामान्य ढंग से परिवार की दिनचर्या और अपनी पढ़ाई पर चर्चा की। परिजनों ने बताया कि उसने कभी किसी तनाव, आर्थिक दबाव या कॉलेज से जुड़ी समस्या का जिक्र नहीं किया था। मां ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि बातचीत में उसकी आवाज बिल्कुल शांत थी और किसी तरह की बेचैनी महसूस नहीं हुई। परिवार ने बताया कि वह अपने भविष्य को लेकर उत्साहित था और कई कंपनियों में इंटर्नशिप के अवसर देख रहा था। परिजनों के अनुसार, उसकी अचानक मौत ने सभी को सदमे में डाल दिया है, और वे समझ नहीं पा रहे कि उसने ऐसा कदम क्यों उठाया। परिवार ने पुलिस से गहरी और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुलिस जांच में मोबाइल डेटा और कॉलेज रिकॉर्ड पर फोकस
पुलिस अब छात्र की मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और हाल की दिनचर्या की जांच कर रही है। जांच अधिकारी पता लगा रहे हैं कि क्या हाल ही में कॉलेज में किसी विवाद, परियोजना के दबाव या परीक्षा को लेकर वह तनाव में था। कॉलेज प्रशासन ने बताया कि छात्र पढ़ाई में अच्छा था और उसका किसी शिक्षक या सहपाठी से कोई विवाद सामने नहीं आया। हॉस्टल में रहने वाले साथियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि उसकी मानसिक स्थिति के बारे में और जानकारी मिल सके। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मोबाइल डेटा आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह अचानक लिया गया कदम था या इसके पीछे कोई गहरा कारण था। यह घटना छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े करती है।


