
भोपाल में नगर निगम की एक गोशाला से जुड़ा मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अरवलिया क्षेत्र की गोशाला में 6 गोवंश मृत पाए जाने के बाद स्थानीय संगठनों ने गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। घटना सामने आने के बाद पुलिस और नगर निगम प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कैसे सामने आया मामला?
जानकारी के मुताबिक, देर रात कुछ संगठनों के पदाधिकारी गोशाला पहुंचे। मुख्य गेट बंद होने पर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस और नगर निगम कर्मचारियों की मौजूदगी में परिसर खोला गया, जहां 6 गोवंश मृत और कई अन्य बीमार अवस्था में मिले। आरोप है कि मृत पशुओं के निपटान के लिए परिसर में गड्ढा खोदा गया था, जिसकी जांच की जा रही है।
आरोप और प्रशासनिक कदम
संगठनों ने दावा किया कि चारे और देखरेख में कमी के चलते गोवंश की हालत बिगड़ी। इस संबंध में थाने में आवेदन देकर पोस्टमार्टम की मांग की गई। प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी/रिकॉर्ड्स के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और परिषद में सवाल
घटना के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। विपक्षी पार्षदों ने स्लॉटर हाउस संचालन और उसकी अनुमति प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अनुमति और निगरानी में चूक हुई है, तो जवाबदेही तय होनी चाहिए।
मानवाधिकार आयोग सदस्य का बयान
स्लॉटर हाउस से जुड़े एक अन्य मामले में मांस की जांच रिपोर्ट के बाद National Human Rights Commission के सदस्य Priyank Kanoongo ने सोशल मीडिया के जरिए जांच की दिशा पर सवाल उठाए। उन्होंने जिम्मेदार एजेंसियों से गहन जांच और स्पष्ट जवाबदेही तय करने की मांग की है।
पुलिस व निगम की स्थिति
- मृत गोवंश का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है
- गोशाला प्रबंधन, सप्लाई और रिकॉर्ड्स की आंतरिक जांच
- स्लॉटर हाउस संचालन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल
प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।


