जनसुरक्षा और पशु कल्याण को ध्यान में रखकर बनाई गई एसओपी
ध्य प्रदेश में आवारा कुत्तों और बेसहारा मवेशियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं, नागरिकों पर हमलों और सार्वजनिक स्थानों पर फैलने वाली अव्यवस्था को नियंत्रित करना है।
एसओपी में साफ तौर पर कहा गया है कि पशुओं के साथ किसी भी तरह की क्रूरता नहीं की जाएगी और उनका प्रबंधन पशु कल्याण कानूनों के तहत ही किया जाएगा। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय निकायों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे तय दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करें। सरकार का मानना है कि इस एसओपी से जनसुरक्षा और पशु संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सकेगा।
आवारा कुत्तों के लिए नसबंदी और टीकाकरण पर जोर
एसओपी के तहत आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नसबंदी और नियमित टीकाकरण को प्राथमिकता दी गई है। नगर निगम और नगर पालिकाओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे एनीमल बर्थ कंट्रोल (ABC) कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करें। इसके तहत कुत्तों की नसबंदी कर उन्हें उसी क्षेत्र में वापस छोड़ा जाएगा, ताकि उनकी संख्या नियंत्रित हो सके। साथ ही, रेबीज जैसी घातक बीमारियों से बचाव के लिए एंटी-रेबीज टीकाकरण भी अनिवार्य किया गया है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे आवारा कुत्तों के प्रति हिंसक व्यवहार न करें और किसी भी समस्या की सूचना संबंधित निकाय को दें।
बेसहारा मवेशियों के लिए गौशालाएं और जिम्मेदारी तय
एसओपी में बेसहारा मवेशियों के प्रबंधन के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश शामिल किए गए हैं। सड़कों पर घूम रहे मवेशियों को पकड़कर गौशालाओं में रखने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन, पंचायतों और नगरीय निकायों को समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मवेशियों को सड़क पर छोड़ने वाले पशुपालकों के खिलाफ जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और यातायात व्यवस्था बेहतर होगी। साथ ही, पशुओं को सुरक्षित वातावरण मिलेगा। प्रशासन ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है, ताकि इस एसओपी को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।


