प्रतिमा हटाने के दौरान हादसा, इलाके में फैला आक्रोश
भोपाल के करोंद क्षेत्र में प्रतिमा हटाने के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब क्रेन में फंसने से एक प्रतिमा टूट गई। यह घटना उस समय हुई, जब नगर निगम की टीम प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कार्रवाई कर रही थी। प्रतिमा टूटते ही मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी फैल गई और देखते ही देखते मामला तूल पकड़ने लगा।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि प्रतिमा हटाने की प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई, जिससे यह हादसा हुआ। लोगों का कहना है कि प्रतिमा केवल एक संरचना नहीं, बल्कि भावनाओं और सम्मान से जुड़ा विषय होती है, ऐसे में प्रशासन को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया और लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की।
26 जनवरी तक भगत सिंह की प्रतिमा लगाने की मांग तेज
प्रतिमा टूटने के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने मांग उठाई है कि उसी स्थान पर शहीद भगत सिंह की प्रतिमा स्थापित की जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 26 जनवरी गणतंत्र दिवस से पहले यह प्रतिमा लगाई जानी चाहिए, ताकि शहीदों के सम्मान का संदेश जाए। उनका तर्क है कि भगत सिंह जैसे महान क्रांतिकारी की प्रतिमा उस क्षेत्र के युवाओं को देशभक्ति और साहस की प्रेरणा देगी। संगठनों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि यदि तय समयसीमा में प्रतिमा नहीं लगाई गई, तो वे शांतिपूर्ण लेकिन व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। इस मांग को लेकर करोंद सहित आसपास के इलाकों में चर्चा तेज हो गई है और सोशल मीडिया पर भी लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
27 जनवरी को प्रदर्शन की चेतावनी, प्रशासन पर बढ़ा दबाव
सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 26 जनवरी तक भगत सिंह की प्रतिमा उसी स्थान पर स्थापित नहीं की गई, तो 27 जनवरी को बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। इसे लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और प्रतिमा टूटने की घटना के कारणों को देखा जा रहा है। साथ ही, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सभी पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है, ताकि स्थिति और न बिगड़े। फिलहाल करोंद क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गंभीर रूप ले सकता है। स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है, जिससे यह तय होगा कि मामला शांतिपूर्ण तरीके से सुलझेगा या आंदोलन का रूप लेगा।


