विदिशा में किया था वादा, अब निभाया संकल्प
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों का उदाहरण पेश किया। विदिशा जिले में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एक बहुदिव्यांग युवक से वादा किया था कि उसकी दैनिक जरूरतों और आत्मनिर्भरता के लिए मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी।
समय बीतने के बाद भी शिवराज सिंह चौहान ने उस वादे को नहीं भुलाया और अपने संकल्प को निभाते हुए गंजबासौदा पहुंचकर दिव्यांग मित्र को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल भेंट की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन समाज की जिम्मेदारी हैं और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने के सभी अवसर मिलने चाहिए। शिवराज ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सहायता नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम है।
ट्रेन से गंजबासौदा पहुंचकर दिया संदेश
शिवराज सिंह चौहान का ट्रेन से गंजबासौदा पहुंचना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। सादगी और जमीन से जुड़े नेतृत्व की पहचान माने जाने वाले शिवराज ने आम यात्रियों की तरह रेल यात्रा कर यह संदेश दिया कि जनसेवा के लिए किसी भी प्रकार का दिखावा आवश्यक नहीं है। स्टेशन पर पहुंचते ही कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वे सीधे दिव्यांग युवक के पास पहुंचे और स्वयं ट्राईसाइकिल सौंपते हुए उसे चलाने की प्रक्रिया भी समझाई। शिवराज ने कहा कि तकनीक का सही उपयोग दिव्यांगजनों के जीवन को आसान बना सकता है और सरकार तथा समाज को मिलकर ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहिए। उनकी इस पहल से स्थानीय लोगों में भी सकारात्मक संदेश गया।
अब बहुदिव्यांगों को खोजकर करेंगे मदद
इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने यह भी घोषणा की कि वे केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ऐसे बहुदिव्यांग लोगों की पहचान कर उन्हें सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे, जिन्हें वास्तव में जरूरत है। उन्होंने कहा कि कई दिव्यांगजन आज भी साधनों के अभाव में घरों में कैद होकर रह जाते हैं, जबकि थोड़ी-सी मदद उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ सकती है। शिवराज ने कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जरूरतमंद दिव्यांगों की जानकारी साझा करें। इस पहल को मानवता और सेवा भाव से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति सशक्त नहीं होगा, तब तक विकास अधूरा रहेगा। यह कार्यक्रम दिव्यांगजनों के लिए आशा और भरोसे का प्रतीक बन गया।


