राज्यपाल का संदेश: संविधान और कर्तव्यों का स्मरण
भोपाल में 26 जनवरी को राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह पूरे गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। लाल परेड मैदान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के राज्यपाल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली।
तिरंगा फहराते ही पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति के नारों और देशभक्ति गीतों से गूंज उठा। अपने संबोधन में राज्यपाल ने संविधान निर्माताओं को नमन करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस हमें अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध कराता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और सामाजिक समरसता बनाए रखने का आह्वान किया। राज्यपाल ने प्रदेश की उपलब्धियों, विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।
परेड और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनीं आकर्षण का केंद्र
समारोह का प्रमुख आकर्षण सशस्त्र बलों, पुलिस, होमगार्ड, एनसीसी और स्कूली बच्चों की परेड रही। अनुशासित कदमताल और सटीक सलामी ने दर्शकों को गर्व से भर दिया। परेड में महिला दस्तों की सहभागिता ने सशक्तिकरण का संदेश दिया। इसके साथ ही स्कूली छात्रों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति और लोकसंस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समां बांध दिया। रंग-बिरंगे परिधानों में बच्चों ने मध्य प्रदेश की लोकनृत्य परंपराओं को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों को सम्मानित भी किया गया, जिससे समाज में सकारात्मक योगदान देने वालों का हौसला बढ़ा।
झांकियों में दिखी मध्य प्रदेश की विकास गाथा
गणतंत्र दिवस समारोह में विभिन्न विभागों और जिलों द्वारा प्रस्तुत झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। इन झांकियों में मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन स्थलों, आदिवासी जीवन, कृषि नवाचार, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास की झलक देखने को मिली। ‘डिजिटल मध्य प्रदेश’, ‘स्वच्छता अभियान’, ‘जल संरक्षण’ और ‘स्वावलंबी महिला’ जैसी थीम पर आधारित झांकियों ने दर्शकों को राज्य की प्रगति से परिचित कराया। झांकियों के माध्यम से सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। समारोह के अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, और लोगों के मन में देशभक्ति व गर्व की भावना और अधिक प्रबल हो गई।


