Bhopal : मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के करीब 2.5 लाख संविदाकर्मियों के लिए ऐतिहासिक घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 30 जनवरी 2026 को भोपाल के दशहरा मैदान में संविदा कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मंच के सम्मेलन में कहा कि 10 साल से अधिक निरंतर सेवा वाले संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर संविलियन किया जाएगा। यह कदम संविदा नीति-2023 को मजबूत करेगा।

पात्रता मानदंड: कौन हो सकता है नियमित?
यह फैसला विशेष रूप से उन संविदाकर्मियों के लिए है जिन्होंने “10 वर्ष से अधिक निरंतर सेवा” पूरी की हो।
पात्रता की मुख्य शर्तें:
- निरंतर 10+ वर्ष सेवा : संविदा नियुक्ति से लगातार सेवा, बिना किसी लंबे ब्रेक के। सुप्रीम कोर्ट के उमादेवी जजमेंट के अनुरूप, अवैध नियुक्ति वाले छूटे रहेंगे।
- विभागीय योग्यता : आवश्यक शैक्षणिक योग्यता (जैसे एमएससी, बीएड) और विभागीय परीक्षा (जैसे व्यापम) पास होना।
- रिक्त पद उपलब्धता : रिक्त नियमित पदों के 50% पर प्राथमिकता, जो आगे बढ़ सकती है। केंद्र/राज्य पोषित योजनाओं, निगम-मंडलों में लागू।
- आरक्षण नियम : 20% संविदा आरक्षित पदों पर हॉरिजेंटल आरक्षण, पर्याप्त उम्मीदवार न होने पर अन्य से भरा जाएगा।
केवल “अनियमित नियुक्ति” वाले पात्र, पूरी तरह अवैध नियुक्ति वाले अयोग्य।
किन-किन पर लागू होगा?
यह नीति “25+ विभागों” में फैली है, मुख्य रूप से:
- स्वास्थ्य विभाग (आतिथ्य शिक्षक सहित)
- शिक्षा विभाग
- पंचायत एवं ग्रामीण विकास
- कृषि, उद्यानिकी
- E-Governance, जन अभियान परिषद
- विकलांग पुनर्वास, अन्य मैदानी स्तर के कर्मचारी।
लाभ: NPS, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य बीमा, अनुकंपा नियुक्ति, महंगाई भत्ता (DA), CCA नियम 1965-66 के दंड प्रावधान।
प्रक्रिया और अगले कदम
नियमित तुरंत नहीं किया जाएगा, पहले संविदा नीति-2023 में संशोधन, फिर विभागवार रिक्त पदों की सूची तैयार। अपर मुख्य सचिव की समिति विसंगतियां दूर करेगी। वित्त, सामान्य प्रशासन और संघर्ष मंच के समन्वय से पारदर्शी कार्यान्वयन होगा।
महत्व और प्रभाव
यह फैसला लाखों परिवारों को स्थायित्व देगा, प्रशासन को मजबूत करेगा। सुप्रीम कोर्ट दिशानिर्देशों पर आधारित, अन्य राज्यों के लिए मॉडल बनेगा। संविदाकर्मी अब स्थायी पद, प्रमोशन और पूर्ण सुरक्षा के हकदार है।


