भारत का केंद्रीय बजट 2026-27 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी 2026 को पेश किया गया, जो विकास, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित है। यह बजट 53.5 लाख करोड़ रुपये का है, जिसमें आर्थिक विकास को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।

बजट के प्रमुख आंकड़े
पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा। राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी का 4.3% रखा गया है। राज्यों को 14 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, जो 41% फंड शेयर सुनिश्चित करता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
बजट में 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा हुई, जैसे मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद और हैदराबाद-बेंगलुरु। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (दंकुनी-सूरत) और ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट्स (बिहार में) पर जोर दिया गया। ये कदम आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगे।
रोजगार और MSME को बढ़ावा
रोजगार सृजन के लिए व्यापक सुधार किए गए, जिसमें 350 से अधिक बदलाव शामिल हैं। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 40,000 करोड़ रुपये आवंटित, जो ओडिशा, केरल आदि राज्यों को लाभ पहुंचाएगा। MSME को लोकल से ग्लोबल बनाने पर जोर, साथ ही स्टार्टअप्स और इनोवेशन को प्रोत्साहन।
कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा
कृषि में ‘भारत विस्तार’ AI टूल किसानों के लिए लॉन्च, जो बहुभाषी सलाह देगा। स्वास्थ्य में 3 आयुर्वेदिक AIIMS और इमरजेंसी सेंटर; शिक्षा में 15,000 स्कूलों में AVGC लैब्स। महिलाओं के लिए हर जिले में लड़की हॉस्टल बनाया जाएगा।
प्रतिक्रियाएं और प्रभाव
प्रधानमंत्री मोदी ने इसे ‘सुधार एक्सप्रेस’ को नई गति देने वाला बताया। विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रिया, जहां कुछ इसे शानदार मानते हैं वहीं अन्य आम जनता के लिए कम राहत बता रहे हैं। कुल मिलाकर, यह बजट विकसित भारत 2047 की दिशा में मजबूत कदम है।


