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    भोपाल में 57 हजार बच्चों का आधार अपडेट अटका, सरकारी योजनाओं पर पड़ा असर

    भोपाल में आधार कार्ड से जुड़ी लापरवाही अब बड़े संकट के रूप में उभर रही है। शहर में करीब 57,000 बच्चों का बायोमीट्रिक अपडेट अभी तक पूरा नहीं हो पाया है, जिसकी वजह से न बच्चों के आधार कार्ड सही से अपडेट हो पाए हैं और न ही वे कई जरूरी सरकारी सुविधाओं का लाभ ले पा रहे हैं।

    क्या है पूरा मामला?

    भोपाल सहित मध्य प्रदेश के कई जिलों में बच्चों के आधार कार्ड तो बन गए, लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़ी उम्र में पहुंचे, उनका बायोमीट्रिक अपडेट समय पर नहीं हो पाया। नियमों के अनुसार एक निश्चित उम्र के बाद बच्चों के आधार में फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन अनिवार्य रूप से अपडेट करना होता है, तभी आधार आगे मान्य माना जाता है। लेकिन भोपाल में हज़ारों परिवार या तो जानकारी के अभाव में या स्लॉट न मिलने की वजह से यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए।

    क्यों ज़रूरी है बच्चों का आधार अपडेट?

    • स्कूल एडमिशन, छात्रवृत्ति और कई अन्य शैक्षणिक योजनाओं में आधार अनिवार्य रूप से मांगा जाता है।
    • कई सरकारी योजनाएं जैसे छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य योजनाएं, राशन आदि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के ज़रिये आधार से जुड़ी होती हैं।
    • भविष्य में पैन, बैंक खाता, मोबाइल सिम आदि से जुड़े कामों के लिए भी अद्यतन आधार होना ज़रूरी है।

    यदि समय पर बच्चों का बायोमीट्रिक अपडेट नहीं होता, तो उनका आधार अस्थायी रूप से निष्क्रिय जैसा हो सकता है, जिससे वे योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।

    माता-पिता और बच्चों को क्या दिक्कतें आ रहीं?

    कई अभिभावकों का कहना है कि जब वे अपडेट सेंटर पर जाते हैं, तो या तो स्लॉट नहीं मिलते या लंबी कतारों की वजह से उन्हें कई-कई बार लौटना पड़ता है। कुछ लोगों को यह भी पता नहीं था कि एक निश्चित उम्र के बाद आधार को अपडेट करना अनिवार्य है, इसलिए वे इस प्रक्रिया से पूरी तरह अनजान रहे।
    स्कूलों में भी कई बार छात्रवृत्ति फॉर्म या सरकारी योजनाओं के लिए सक्रिय आधार नंबर की मांग की जाती है, जिसकी वजह से बच्चों के एडमिशन या फ़ीस छूट संबंधी लाभ में देरी हो सकती है।

    प्रशासन और एजेंसियों की जिम्मेदारी

    इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के आधार अपडेट लंबित होना सिस्टम की एक बड़ी खामी को उजागर करता है।

    • संबंधित विभागों को समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर अभिभावकों को जानकारी देनी चाहिए थी।
    • स्कूलों के माध्यम से भी नोटिस और कैंप लगाकर बच्चों के आधार अपडेट का काम तेज़ी से किया जा सकता था।
    • अधिक भीड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त आधार अपडेट कैंप लगाकर प्रक्रिया को सरल किया जा सकता है।

    यदि प्रशासन सक्रिय होकर विशेष कैंप चलाए और ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया को आसान बनाए, तो कम समय में बड़ी संख्या में बच्चों के आधार अपडेट पूरे किए जा सकते हैं।

    आगे का रास्ता: क्या होना चाहिए?

    1. जागरूकता अभियान
    स्थानीय अखबारों, टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया के माध्यम से अभिभावकों को स्पष्ट संदेश दिया जाए कि किस उम्र में बच्चों का बायोमीट्रिक अपडेट अनिवार्य है और इसे न कराने पर क्या नुकसान हो सकता है।

    2. स्कूल-आधारित कैंप
    सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में विशेष आधार अपडेट कैंप लगाकर बच्चों का बायोमीट्रिक एक ही जगह पर किया जा सकता है, जिससे अभिभावकों का समय और मेहनत दोनों बचेंगे।

    3. अतिरिक्त सेंटर और समय
    जिन इलाकों में लंबित संख्या ज़्यादा है, वहां अतिरिक्त आधार नामांकन/अपडेट सेंटर खोले जाएं या मौजूदा सेंटर के समय में अस्थायी बढ़ोतरी की जाए।

    4. ऑनलाइन स्लॉट सिस्टम में सुधार
    कई लोग ऑनलाइन स्लॉट न मिलने की शिकायत करते हैं, इसलिए तकनीकी सिस्टम को बेहतर बनाना और हेल्पलाइन नंबर जारी करना भी ज़रूरी है।

    निष्कर्ष

    भोपाल में 57,000 बच्चों का आधार अपडेट लंबित होना सिर्फ़ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि हज़ारों परिवारों के लिए भविष्य की संभावित मुश्किलों की चेतावनी है। यदि समय रहते प्रशासन और अभिभावक दोनों मिलकर सक्रिय कदम उठाते हैं, तो बच्चों को सरकारी योजनाओं, शिक्षा और अन्य सुविधाओं से वंचित होने से बचाया जा सकता है।

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