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    एमपी में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर: 23-24 फरवरी को 30 हजार कर्मियों की हड़ताल

    दो दिवसीय हड़ताल की घोषणा और काली पट्टी के साथ विरोध

    मध्य प्रदेश में 23-24 फरवरी को संविदा और आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों ने दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है। करीब 30 हजार कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि मरीजों को असुविधा न हो, इसलिए कई कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम भी कर रहे हैं और साथ ही अपने विरोध को दर्ज करा रहे हैं।

    कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी के चलते सामूहिक रूप से हड़ताल का रास्ता अपनाया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े होने के कारण उन्होंने आपातकालीन सेवाओं को बाधित न करने का निर्णय भी लिया है।

    9 प्रमुख मांगें: नियमितीकरण से वेतन विसंगति तक

    आंदोलन कर रहे कर्मचारियों ने कुल 9 मांगें शासन के सामने रखी हैं। इनमें नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, वेतन वृद्धि, नौकरी की सुरक्षा, ईपीएफ और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ शामिल हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि वे वर्षों से संविदा या आउटसोर्स व्यवस्था में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रहीं। कई जिलों में वेतन समय पर न मिलने और सेवा शर्तों में असमानता की भी शिकायतें सामने आई हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना काल में उन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर सेवाएं दीं, फिर भी उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उनका मानना है कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए तो स्वास्थ्य तंत्र और मजबूत होगा।

    सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा के लिए संवाद की प्रक्रिया शुरू की है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ मांगें नीतिगत स्तर की हैं, जिन पर वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा। वहीं कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। फिलहाल 23-24 फरवरी की हड़ताल को लेकर प्रदेशभर में बैठकों और ज्ञापन सौंपने का दौर जारी है। स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखते हुए अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की रणनीति के साथ कर्मचारी आगे बढ़ रहे हैं। अब सभी की नजर शासन और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी है, जिससे इस गतिरोध का समाधान निकल सके।

    Sanjay
    Author: Sanjay

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