अनुपूरक बजट पेश होते ही शुरू हुआ हंगामा
विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश होते ही सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बजट में पानी आपूर्ति, दवाइयों की खरीद, कफ-सिरप और डॉग बाइट (रेबीज) से बचाव के लिए वैक्सीन पर किए गए प्रावधानों को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए।
विपक्ष का आरोप था कि सरकार बुनियादी सेवाओं की कमी को छिपाने के लिए अनुपूरक बजट के जरिए “मरहम” लगाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि यदि पहले से पर्याप्त प्रबंधन होता तो अतिरिक्त बजट की जरूरत ही नहीं पड़ती। सदन में इस मुद्दे पर जोरदार बहस हुई और कई बार कार्यवाही भी बाधित हुई।
कांग्रेस का तंज और बीजेपी का पलटवार
विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रदेश में “मोदियाबिंद” की कोई दवा नहीं है, यानी सरकार वास्तविक समस्याओं को देखने से बच रही है। कांग्रेस नेताओं ने स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल संकट और दवा आपूर्ति में गड़बड़ी के मुद्दे उठाए। इसके जवाब में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने तीखा पलटवार किया। बीजेपी नेताओं ने कहा कि विपक्ष केवल बयानबाजी कर रहा है और यदि उन्होंने “समय पर दवा ली होती” तो वे आज भाजपा में होते। इस बयान पर सदन में ठहाके भी लगे, लेकिन माहौल लगातार गर्म बना रहा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर प्रदेश की व्यवस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।
पानी, स्वास्थ्य और जनहित के मुद्दों पर जोर
बहस के दौरान पानी आपूर्ति योजनाओं में देरी, अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और डॉग बाइट के मामलों में बढ़ोतरी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। सरकार की ओर से कहा गया कि अनुपूरक बजट का उद्देश्य जनहित योजनाओं को गति देना और आकस्मिक जरूरतों को पूरा करना है। अधिकारियों का तर्क था कि बढ़ती आबादी और महंगाई के कारण अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता स्वाभाविक है। वहीं विपक्ष का कहना था कि योजनाओं की सही मॉनिटरिंग और पारदर्शिता से ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था। कुल मिलाकर, अनुपूरक बजट पर चर्चा ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। अब देखना होगा कि सदन में उठे सवालों का समाधान किस तरह निकलता है और क्या सरकार विपक्ष की चिंताओं को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाती है।


