
भोपाल के भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) में गैस पीड़ितों की स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अस्पताल प्रशासन ने निर्णय लिया है कि वर्षों से रखे गए मरीजों के कागजी मेडिकल रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल सिस्टम में बदला जाएगा, जिससे इलाज की प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और अधिक पारदर्शी हो सके।
एक साल में सभी पुराने रिकॉर्ड होंगे डिजिटल
नई पहल के तहत गैस पीड़ितों और उनके आश्रितों से जुड़े पुराने इलाज दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से स्कैन कर डिजिटल फॉर्मेट में बदला जाएगा। इसके लिए अस्पताल ने भारत सरकार के उपक्रम HLL Infra Tech Services Limited के साथ समझौता किया है।
अस्पताल के अनुसार, परियोजना को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि सभी मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री एक क्लिक पर उपलब्ध हो सके।
इलाज में क्या बदलेगा?
डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम लागू होने के बाद:
- डॉक्टर तुरंत मरीज की पूरी बीमारी का इतिहास देख सकेंगे
- आपात स्थिति में इलाज तेजी से शुरू होगा
- बार-बार एक ही जांच कराने की जरूरत कम होगी
- दवाओं और उपचार की निरंतरता बेहतर बनेगी
इससे मरीजों को समय की बचत और बेहतर चिकित्सा निर्णय का फायदा मिलेगा।
फाइल खोने या खराब होने की समस्या खत्म
अब तक हजारों कागजी फाइलों के सुरक्षित रख-रखाव में जोखिम बना रहता था। डिजिटल सिस्टम लागू होने से-
- रिकॉर्ड लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगे
- जरूरत पड़ने पर तुरंत एक्सेस मिल सकेगा
- इलाज की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी
गैस पीड़ितों के लिए टेक्नोलॉजी आधारित हेल्थकेयर
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यह कदम गैस पीड़ितों को आधुनिक और विश्वसनीय स्वास्थ्य सुविधाएं देने की दिशा में अहम बदलाव है। परियोजना पूरी होने के बाद मरीजों को पहले से ज्यादा व्यवस्थित और तेज इलाज मिल सकेगा।


