बजट पेश होते ही उठे पुराने वादों के मुद्दे
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम सदन की बैठक के दौरान महापौर मालती राय ने बजट प्रस्तुत किया। बजट में शहर के विकास के लिए कई नई योजनाओं और परियोजनाओं की घोषणा की गई, लेकिन जैसे ही बजट पेश हुआ, सदन में पुराने वादों को लेकर बहस तेज हो गई। विपक्षी पार्षदों ने सवाल उठाया कि पिछले वर्षों में किए गए वादे अब तक पूरे क्यों नहीं हुए। उनका कहना था कि जब पुराने कार्य अधूरे पड़े हैं, तो नए वादों पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है। इस मुद्दे पर सदन में काफी देर तक चर्चा और बहस चलती रही।
गीता भवन और हेरिटेज गेट परियोजनाएं बनीं चर्चा का केंद्र
सदन की कार्यवाही के दौरान गीता भवन और प्रस्तावित हेरिटेज गेट परियोजनाओं को लेकर विशेष रूप से सवाल उठाए गए। इन दोनों योजनाओं को शहर की सांस्कृतिक पहचान और विकास से जोड़कर देखा गया था, लेकिन अब तक इन पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। पार्षदों ने आरोप लगाया कि इन परियोजनाओं की केवल घोषणा की गई, लेकिन जमीन पर काम नहीं हुआ। इससे जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की कि इन अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
नए वादों पर टिकी निगाहें, जवाबदेही की मांग
महापौर द्वारा पेश किए गए बजट में सड़क, पानी, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए कई नई योजनाएं शामिल हैं। हालांकि, पार्षदों और आम जनता की नजर इस बात पर है कि इन योजनाओं को कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। सदन में यह मांग भी उठी कि सभी परियोजनाओं के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जाए और उनकी नियमित समीक्षा की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करे, तो शहर के विकास को नई गति मिल सकती है। फिलहाल यह बजट चर्चा और उम्मीदों के बीच घिरा हुआ है, जहां एक ओर नए वादे हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने अधूरे कार्यों की याद भी लोगों को चिंता में डाल रही है।


