मौजूदा परिसर में ही होगा निर्माण
भोपाल कलेक्ट्रेट के मौजूदा परिसर में ही नई प्रशासनिक बिल्डिंग बनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसको लेकर प्रशासनिक स्तर पर प्राथमिक चर्चा पूरी हो चुकी है।
कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि नई बिल्डिंग किसी अन्य स्थान पर नहीं, बल्कि वर्तमान कलेक्ट्रेट परिसर में ही विकसित की जाएगी, ताकि आम नागरिकों और कर्मचारियों को सुविधा मिल सके। प्रस्तावित भवन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और बढ़ती प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
कमिश्नर ने विभागों से मांगी स्पेस की मांग
इस संबंध में कमिश्नर ने कलेक्ट्रेट में संचालित सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने प्रत्येक विभाग से यह जानकारी मांगी कि उन्हें कितने कार्यालय कक्ष, कर्मचारियों के लिए कितना स्थान, रिकॉर्ड रूम, मीटिंग हॉल और अन्य सुविधाओं के लिए कितनी जगह की आवश्यकता है। कमिश्नर ने अधिकारियों से कहा कि वे भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखते हुए अपनी मांग प्रस्तुत करें, ताकि बाद में किसी तरह की असुविधा न हो।
नागरिकों और कर्मचारियों को मिलेगी बेहतर सुविधा
नई बिल्डिंग के निर्माण का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को अधिक सुचारु बनाना और आम जनता को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है। वर्तमान कलेक्ट्रेट भवन में जगह की कमी, भीड़ और अव्यवस्थित कार्यालयों की समस्या लंबे समय से सामने आ रही थी। नई इमारत बनने के बाद विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा और फाइलों के निपटारे में भी तेजी आएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सभी विभागों से स्पेस की जानकारी मिलने के बाद भवन का लेआउट और डिजाइन तैयार किया जाएगा। इसके बाद निर्माण कार्य के लिए बजट प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तय समय-सीमा में अपनी आवश्यकताओं की जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि परियोजना में देरी न हो।
यह परियोजना भोपाल के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि नई कलेक्ट्रेट बिल्डिंग बनने से न केवल कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि नागरिकों को भी विभिन्न विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि निर्माण कार्य कब शुरू होता है और यह परियोजना कितनी तेजी से धरातल पर उतरती है।


