मंदिर में रखी दवा से हुआ दर्दनाक हादसा
एक बेहद दुखद और हृदय विदारक घटना में 12वीं कक्षा की एक छात्रा की जान चली गई। जानकारी के अनुसार, छात्रा की मां ने घर के मंदिर में चूहों से बचाव के लिए चूहा मारने की दवाई रखी थी। यह दवाई देखने में भभूत जैसी थी। पूजा के दौरान छात्रा ने अनजाने में इसे भभूत समझकर खा लिया।
कुछ ही देर में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। शुरुआत में परिवार को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन जब छात्रा को उल्टियां और चक्कर आने लगे, तब घर में हड़कंप मच गया। आस्था के स्थान पर रखी गई यह जहरीली दवा एक मासूम जान के लिए काल बन गई।
अस्पताल में चला इलाज, नहीं बच सकी जान
छात्रा की हालत बिगड़ते देख परिजन उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए आईसीयू में भर्ती किया। परिजनों के अनुसार छात्रा पढ़ाई में तेज थी और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन जहर का असर शरीर पर तेजी से फैल चुका था। कई घंटों तक चले इलाज के बावजूद उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो सका। अंततः इलाज के दौरान छात्रा ने दम तोड़ दिया। बेटी की मौत की खबर मिलते ही माता-पिता बेसुध हो गए और अस्पताल परिसर में मातम छा गया।
समाज के लिए चेतावनी बनी यह घटना
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर लापरवाही के गंभीर परिणामों की ओर ध्यान खींचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि चूहा मारने की दवाई, कीटनाशक और अन्य जहरीले पदार्थ कभी भी बच्चों की पहुंच में या पूजा स्थल जैसे स्थानों पर नहीं रखने चाहिए। ऐसी वस्तुओं को स्पष्ट पहचान के साथ सुरक्षित और बंद स्थान पर रखा जाना चाहिए। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि थोड़ी-सी असावधानी भी किसी परिवार की खुशियां छीन सकती है। मासूम जान की इस असमय मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।


