आठ साल से अधूरे मकानों का दर्द
भोपाल में कई हाउसिंग प्रोजेक्ट वर्षों से अधूरे पड़े हैं, जिससे घर का सपना देखने वाले सैकड़ों परिवारों का धैर्य टूटने लगा है। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई इन प्रोजेक्ट्स में निवेश की, लेकिन आठ साल बीत जाने के बाद भी उन्हें न तो मकान मिला और न ही कोई ठोस जवाब।
पीड़ित खरीदारों का आरोप है कि बिल्डरों और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही के कारण वे लगातार भटकने को मजबूर हैं। कभी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं तो कभी सुनवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिलते हैं। इस स्थिति से नाराज होकर प्रभावित लोगों ने एकजुट होकर विरोध जताया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान फूटा आक्रोश
अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के खिलाफ लोगों का गुस्सा तब खुलकर सामने आया, जब बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और अपनी पीड़ा मीडिया के सामने रखी। लोगों का कहना था कि वे पिछले आठ वर्षों से कभी बिल्डर के पास, तो कभी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। कई परिवार किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
महापौर का बयान—रेरा की अनुमति से हुई देरी
मामले पर महापौर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में देरी का मुख्य कारण रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) से जुड़ी प्रक्रियाएं रही हैं। उन्होंने बताया कि रेरा की अनुमति और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के चलते काम तय समय पर पूरा नहीं हो सका। हालांकि महापौर ने यह भी आश्वासन दिया कि अब सभी औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं और निर्माण कार्य जल्द ही गति पकड़ेगा। उन्होंने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है और जल्द से जल्द उन्हें उनके घर सौंपने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद भी लोग चाहते हैं कि अब सिर्फ बातें नहीं, बल्कि जमीन पर काम होता दिखाई दे।


