भोपाल पुलिस कमिश्नर को सौंपी गई शिकायत
भोपाल में कथावाचक धीरेन्द्र शास्त्री के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराए जाने से सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। यह शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता दामोदर यादव द्वारा भोपाल पुलिस कमिश्नर को सौंपी गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कथावाचक द्वारा किए जा रहे कथित चमत्कार, अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले बयान और तथाकथित इलाज लोगों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।
दामोदर यादव का कहना है कि ऐसे आयोजनों में गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग वैज्ञानिक और चिकित्सकीय इलाज छोड़कर झूठे दावों पर भरोसा कर रहे हैं, जिससे कई मामलों में स्थिति बिगड़ने और मौत तक की नौबत आ रही है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
अंधविश्वास और झूठे इलाज पर गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथावाचक के प्रवचनों और आयोजनों में बीमारी ठीक करने, भूत-प्रेत हटाने और चमत्कारिक इलाज जैसे दावे किए जाते हैं, जो सीधे तौर पर अंधविश्वास फैलाने की श्रेणी में आते हैं। दामोदर यादव ने कहा कि जब प्रभावशाली व्यक्ति इस तरह के दावे करते हैं, तो आम लोग उन पर आंख बंद कर भरोसा कर लेते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि मरीज समय पर डॉक्टर के पास नहीं जाते और इलाज में देरी होने से उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में पहले से ही अंधविश्वास उन्मूलन को लेकर कानून मौजूद हैं, लेकिन प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई न होने से ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। शिकायत में यह मांग भी की गई है कि आयोजनों में किए जा रहे दावों की वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
केस दर्ज करने की मांग और प्रशासन की भूमिका
दामोदर यादव ने पुलिस से मांग की है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि भविष्य में किसी की जान ऐसे झूठे दावों की वजह से न जाए। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि समाज के बड़े हित से जुड़ा हुआ है। वहीं, पुलिस प्रशासन का कहना है कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है और उसका अध्ययन किया जा रहा है। सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस बीच, इस शिकायत के बाद शहर में बहस छिड़ गई है—एक पक्ष इसे अंधविश्वास के खिलाफ जरूरी कदम बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे आस्था पर हमला मान रहा है। फिलहाल, निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है और कानून के दायरे में क्या कार्रवाई की जाती है।


