इन्हेलर का गलत उपयोग बढ़ा रहा COPD का खतरा
AIIMS भोपाल द्वारा जारी ताज़ा अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शोध में पाया गया कि अधिकांश मरीज इन्हेलर का सही तकनीक से उपयोग नहीं कर रहे, जिसके कारण दवा फेफड़ों तक पूरी क्षमता से नहीं पहुंच पाती। डॉक्टरों के अनुसार, इन्हेलर का गलत उपयोग न केवल उपचार को बेअसर करता है, बल्कि धीरे-धीरे सांस की दिक्कतों को बढ़ाकर क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के गंभीर चरण तक पहुंचा देता है।
AIIMS विशेषज्ञों ने बताया कि कई मरीज इन्हेलर लेते समय सही मात्रा में सांस नहीं खींचते, समय-मान नहीं रखते या स्पेसर का उपयोग नहीं करते, जिससे दवा गले में रुक जाती है। इससे बीमारी नियंत्रण में नहीं आती और मरीज को बार-बार अटैक, खांसी, घरघराहट तथा सांस फूलने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
अध्ययन में सामने आए चिंताजनक आंकड़े
AIIMS भोपाल ने यह अध्ययन World COPD Day के मौके पर प्रकाशित किया, जिसमें 200 से अधिक मरीजों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 70% से अधिक मरीज इन्हेलर उपयोग करने में कोई न कोई गंभीर गलती करते पाए गए।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि तकरीबन 40% मरीजों को इन्हेलर शुरू होने के बाद भी आराम नहीं मिला, इसका कारण था गलत पकड़, जल्दी-जल्दी पफ लेना या उपयोग के बाद सांस रोककर न रखना।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर गलत तकनीक का उपयोग यह दर्शाता है कि मरीजों को इन्हेलर की ट्रेनिंग सही तरीके से नहीं दी जा रही है। इससे दवा का प्रभाव 30–40% तक कम हो जाता है और रोगी को लगता है कि उसकी बीमारी बढ़ रही है, जबकि वास्तविक कारण तकनीकी त्रुटि है।
डॉक्टरों की सलाह: तकनीक सुधारें, जोखिम घटाएं
AIIMS भोपाल के पल्मोनरी विभाग के चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि COPD जैसे रोग में इन्हेलर जीवनरक्षक भूमिका निभाता है, इसलिए उसकी तकनीक का सही होना बेहद ज़रूरी है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि मरीज हर विजिट पर डॉक्टर या नर्स को अपनी तकनीक दिखाएं ताकि गलतियों को समय रहते सुधारा जा सके। डॉक्टरों ने बताया कि इन्हेलर लेते समय गहरी सांस लेना, पफ के साथ सांस का तालमेल रखना, और उपयोग के बाद 5–10 सेकंड सांस रोकना बेहद जरूरी है।
AIIMS की टीम ने यह भी कहा कि मरीजों को ऑनलाइन वीडियो, डेमो सत्र और अस्पताल में उपलब्ध मॉडल की मदद से अभ्यास करना चाहिए। सही तकनीक अपनाकर रोग की प्रगति पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
जागरूकता बढ़ाने की जरूरत, विशेषज्ञों का मत
World COPD Day के अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि आम लोग अक्सर सांस की छोटी समस्या को हल्के में लेते हैं और गलत तरीके से इलाज करते रहते हैं, जिससे हालत गंभीर हो जाती है।
AIIMS भोपाल का मानना है कि अगर मरीज सही तकनीक सीख लें, समाज में धूम्रपान कम हो और वायु गुणवत्ता सुधारने के प्रयास बढ़ें, तो COPD के मामलों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
इसके साथ ही विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि अस्पतालों और क्लिनिकों में इन्हेलर उपयोग की नियमित काउंसलिंग अनिवार्य की जाए, ताकि मरीज जागरूक हों और गंभीर होने से पहले ही बीमारी को नियंत्रित किया जा सके।


