कई शहरों में एक साथ प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ नारेबाजी
नए श्रम कानूनों के विरोध में प्रदेश के कई शहरों में कर्मचारियों और मजदूर संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इंदौर, भोपाल सहित विभिन्न जिलों में कर्मचारी संगठनों के बैनर तले रैलियां निकाली गईं और धरना-प्रदर्शन किए गए।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चारों नई श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि ये कानून श्रमिक हितों के खिलाफ हैं और इससे कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा तथा अधिकारों पर असर पड़ेगा। कई स्थानों पर ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें प्रशासन तक पहुंचाई गईं।
चारों श्रम संहिताओं को बताया श्रमिक विरोधी
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि नए लेबर लॉ लागू होने से कार्य के घंटे बढ़ सकते हैं, ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा और श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा कमजोर होगी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार ने श्रमिक संगठनों से पर्याप्त संवाद किए बिना ही इन कानूनों को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। उनका दावा है कि श्रम संहिताएं पूंजीपतियों के हित में बनाई गई हैं और इससे आम कर्मचारियों की स्थिति और कठिन हो सकती है। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सरकार का पक्ष और आगे की रणनीति
वहीं, सरकार का कहना है कि नई श्रम संहिताओं का उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल और पारदर्शी बनाना है, जिससे निवेश को बढ़ावा मिले और रोजगार के अवसर सृजित हों। अधिकारियों का दावा है कि इन सुधारों से उद्योगों और श्रमिकों दोनों को लाभ होगा। हालांकि, कर्मचारी संगठनों ने सरकार से पुनर्विचार कर व्यापक चर्चा करने की मांग दोहराई है। फिलहाल, आंदोलन जारी है और आने वाले दिनों में इसकी रणनीति को लेकर संयुक्त मंच की बैठक बुलाई गई है। यह विरोध प्रदर्शन प्रदेश में श्रमिक मुद्दों को लेकर बढ़ती सक्रियता का संकेत माना जा रहा है।


