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    भोपाल एम्स की IPD में बिना अटेंडर कार्ड नो एंट्री, चेन स्नेचिंग के बाद सख्त फैसला

    लिफ्ट में कर्मचारी से चेन स्नेचिंग, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    भोपाल एम्स (AIIMS Bhopal) की आईपीडी (इन-पेशेंट डिपार्टमेंट) में हाल ही में हुई चेन स्नेचिंग की घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि एम्स की एक लिफ्ट में अज्ञात आरोपी ने महिला कर्मचारी से सोने की चेन झपट ली और मौके से फरार हो गया।

    घटना अस्पताल परिसर के भीतर होने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। घटना की सूचना मिलते ही एम्स प्रशासन और पुलिस हरकत में आई और सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ-साथ आरोपी की पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई। इस घटना ने मरीजों, कर्मचारियों और उनके परिजनों में भय का माहौल पैदा कर दिया।

    IPD में अटेंडर कार्ड अनिवार्य, बिना पहचान प्रवेश पर रोक

    घटना के बाद एम्स प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आईपीडी में बिना अटेंडर कार्ड प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। अब प्रत्येक मरीज के साथ आने वाले अटेंडर को वैध अटेंडर कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा। सुरक्षा गेट, लिफ्ट और वार्ड के बाहर तैनात गार्ड्स को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बिना कार्ड किसी भी व्यक्ति को अंदर प्रवेश न करने दिया जाए। प्रशासन का मानना है कि अस्पताल में बाहरी और संदिग्ध लोगों की आवाजाही पर नियंत्रण रखने से ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है। साथ ही लिफ्ट और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी तैनात किए जा रहे हैं, ताकि मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    आरोपी का रूट मैप खंगाल रही पुलिस, सीसीटीवी से मिले अहम सुराग

    चेन स्नेचिंग की घटना को लेकर पुलिस भी सक्रिय हो गई है और आरोपी के रूट मैप को खंगाला जा रहा है। अस्पताल परिसर के सभी प्रवेश और निकास द्वारों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में आरोपी की गतिविधियां कैमरे में कैद होने की बात सामने आई है, जिसके आधार पर उसके भागने के रास्तों और संभावित ठिकानों का पता लगाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि आरोपी जल्द गिरफ्त में होगा। वहीं एम्स प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर और भी सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं, ताकि मरीजों और कर्मचारियों को सुरक्षित माहौल मिल सके।

    Sanjay
    Author: Sanjay

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