
अमेरिका जैसे विकसित देश में एक चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है – प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और मैकेनिक जैसे स्किल्ड वर्कर्स को सालाना 1 करोड़ रुपये तक की सैलरी ऑफर की जा रही है, फिर भी लोग नौकरी करने को तैयार नहीं हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि Ford Motor Company में ही 5,000 मैकेनिक की पोस्ट खाली पड़ी हैं, लेकिन इतने बड़े पैकेज के बावजूद कंपनी को योग्य लोग नहीं मिल रहे।
Ford को चाहिए 5,000 मैकेनिक
Ford Motor Company के CEO जिम फार्ले ने बताया कि कंपनी बड़े पैकेज देने के बावजूद भी मैकेनिक नहीं ढूंढ पा रही है।
उन्होंने कहा:
- यह सिर्फ Ford की समस्या नहीं है। पूरे अमेरिका में 10 लाख से ज्यादा स्किल्ड ट्रेड्स की नौकरियां खाली पड़ी हैं।
इन नौकरियों में शामिल हैं –
- प्लंबर
- इलेक्ट्रिशियन
- ट्रक ड्राइवर
- फैक्ट्री वर्कर्स
- मैकेनिक
आखिर समस्या कहाँ है? – शिक्षा और ट्रेनिंग की कमी
फार्ले ने बताया कि आज का युवा टेक्निकल और मैनुअल स्किल्स से दूर चला गया है।
उदाहरण:
- एक Ford Super Duty Truck का डीज़ल इंजन निकालना सीखने में 5 साल लगते हैं।
- लेकिन आज की जनरेशन को ऐसी ट्रेनिंग दी ही नहीं जा रही।
उन्होंने कहा कि पहले के समय में तकनीकी शिक्षा परिवारों को मिडिल क्लास बनाने में मदद करती थी, लेकिन अब वही परंपरा खत्म हो रही है।
नई पीढ़ी का फोकस केवल AI और रोबोटिक्स?
अमेरिका में युवा AI, सॉफ़्टवेयर, रोबोटिक्स और हाई-टेक करियर की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
लेकिन समस्या यह है कि:
- कार फैक्ट्रियों को मैकेनिक चाहिए
- सर्विस सेंटर्स को टेक्नीशियन चाहिए
- ट्रकिंग नेटवर्क को ड्राइवर चाहिए
और इन सबकी भारी कमी हो गई है।
H-1B वीजा पर ट्रम्प का यू-टर्न
Fox News पर इंटरव्यू में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्वीकार किया कि:
- अमेरिका के पास कई स्किल्स की कमी है, इसलिए हमें H-1B के जरिए बाहर से टैलेंट लाना पड़ेगा।
यह बयान तब आया जब उनकी सरकार ने H-1B वीजा की फीस $100,000 कर दी है, जिससे विदेशी टैलेंट को आना और मुश्किल हो गया है।
1 करोड़ रुपये तक की सैलरी
कई अमेरिकी शहरों में:
- प्लंबर: $120,000 / वर्ष (लगभग 1 करोड़ रुपये)
- इलेक्ट्रिशियन: $100,000 / वर्ष
- मैकेनिक: $90,000–$120,000 / वर्ष
के बावजूद भी योग्य लोग नहीं मिल पा रहे हैं।
Ford की फैक्ट्रियों में हजारों कारें असेंबली लाइन पर अधूरी पड़ी हैं, क्योंकि उन्हें पूरा करने वाले टेक्नीशियन ही नहीं हैं।
विशेषज्ञों का सुझाव
असली कैपिटल – स्किल्ड मैनपावर
विशेषज्ञों का कहना है:
- अमेरिका की अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ स्किल्ड ट्रेड्स हैं।
- AI और रोबोटिक्स देश चला सकते हैं, लेकिन मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन, ड्राइवर और प्लंबर उतने ही जरूरी हैं।
- अगर तत्काल निवेश नहीं किया गया, तो अगले 5 साल में प्रोडक्शन और सर्विस सेक्टर दोनों में बड़ा संकट आ सकता है।
उच्च शिक्षा और हाई-टेक करियर की दौड़ में अमेरिका ने अपने बुनियादी स्किल्स खो दिए हैं। अब हालत ऐसी है कि 1 करोड़ रुपये सालाना पैकेज पर भी प्लंबर-इलेक्ट्रिशियन-मैकेनिक काम करने को तैयार नहीं मिल रहे।
यह स्थिति दिखाती है कि आने वाला समय स्किल्ड ट्रेड्स वाले लोगों के लिए वैश्विक स्तर पर बड़े अवसर लेकर आएगा।


