
भोपाल की सबसे बड़ी पब्लिक ट्रांसपोर्ट परियोजना भोपाल मेट्रो को शुरू हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन ज़मीनी हकीकत उम्मीदों से काफी अलग नज़र आ रही है। रोज़ाना कई चक्कर लगाने के बावजूद मेट्रो ट्रेनों में सन्नाटा पसरा हुआ है और यात्री संख्या बेहद सीमित बनी हुई है।
13 ट्रिप, लेकिन गिनती के यात्री
मेट्रो इस समय रोज़ करीब 13 ट्रिप चला रही है, लेकिन औसतन 300 के आसपास यात्री ही सफर कर रहे हैं। ट्रैफिक जाम का समाधान मानी जा रही यह मेट्रो फिलहाल खाली डिब्बों की तस्वीर पेश कर रही है।
भव्य उद्घाटन, फिर फीकी शुरुआत
20 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल मेट्रो का उद्घाटन किया था। इसके साथ ही भोपाल देश के 26 मेट्रो शहरों की सूची में शामिल हुआ। शुरुआती दिनों में लोगों की मेट्रो में घूमने का उत्साह दिखा, लेकिन दो हफ्ते के भीतर ही टाइमटेबल बदला गया और ट्रिप घटानी पड़ीं।
डिजाइन और टेक्नोलॉजी पर सवाल
शहर के ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट और आम यात्री कई खामियों की ओर इशारा कर रहे हैं:
- सिर्फ 7 किमी के हिस्से में 8 स्टेशन, जिससे रफ्तार और उपयोगिता दोनों पर असर
- मैनुअल टिकटिंग, न QR टिकट, न मोबाइल ऐप
आगे क्या है मेट्रो का प्लान?
भोपाल मेट्रो का संचालन कर रही एजेंसी MPMRCL का कहना है कि आने वाले समय में स्टूडेंट्स और सीनियर सिटीज़न्स के लिए रियायती पास, ऑनलाइन टिकटिंग सिस्टम, बेहतर कनेक्टिविटी जैसे विकल्प लाए जाएंगे। हालांकि अधिकारी मानते हैं कि इन सुधारों में वक्त लगेगा।
असली परीक्षा अभी बाकी
फिलहाल मेट्रो की सफलता इस बात पर टिकी है कि ऑरेंज और ब्लू लाइन कब पूरी होती हैं, जिनमें अभी दो साल या उससे ज्यादा का समय लग सकता है। मौजूदा हालात में कम किराया वसूली और ज्यादा ऑपरेटिंग कॉस्ट के चलते परियोजना नुकसान में चल रही है।


