
भोपाल से उठी कचरा प्रबंधन की बहस अब पूरे देश के लिए सख्त संदेश बन गई है। अदालत के हालिया निर्देशों के बाद साफ संकेत है कि कचरा अब सिर्फ नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी। नए निर्देशों के मुताबिक, घर-घर में चार अलग-अलग डस्टबिन रखना अनिवार्य होगा। यदि कचरा बिना छंटाई के दिया गया तो मौके पर ही जुर्माना लगाया जा सकेगा।
कौन-से चार डस्टबिन रखना होंगे?
हर परिवार को अब इन श्रेणियों में कचरा अलग करना होगा:
- गीला कचरा (रसोई और जैविक अपशिष्ट)
- सूखा कचरा (प्लास्टिक, कागज, पैकेजिंग)
- सेनेटरी/बायो-वेस्ट
- ई-वेस्ट (इलेक्ट्रॉनिक सामान)
अगर कचरा मिलाकर दिया गया तो नगर निगम कर्मचारी तत्काल कार्रवाई कर सकते हैं।
सिर्फ नागरिक ही नहीं, अफसर भी जवाबदेह
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि बिना छंटाई का कचरा डंपिंग साइट तक पहुंचता है तो संबंधित अधिकारी और जिम्मेदार प्रतिनिधि भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे। बड़े मॉल, अस्पताल, स्कूल और संस्थानों को अपने स्तर पर कचरे का वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित करना होगा एवं कचरा निपटान की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।
डंपिंग ग्राउंड की आग से मिली सीख
भोपाल के डंपिंग यार्ड में बार-बार आग लगने की घटनाओं के बाद कचरा प्रबंधन पर सख्ती की जरूरत महसूस की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घर से ही कचरे की छंटाई शुरू हो जाए, तो पर्यावरणीय नुकसान और जहरीले धुएं की घटनाएं काफी हद तक रोकी जा सकती हैं।
अब स्कूलों में भी पढ़ाया जाएगा कचरा प्रबंधन
नए निर्देशों के तहत कचरा प्रबंधन को स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल करने की तैयारी है।
- बच्चों को शुरू से ही गीले-सूखे कचरे का अंतर सिखाया जाएगा
- स्वच्छता और रिसाइक्लिंग की व्यवहारिक जानकारी दी जाएगी
- बेहतर काम करने वाले संस्थानों को सम्मानित किया जाएगा
स्पष्ट है कि आने वाले समय में कचरा प्रबंधन को लेकर सख्ती बढ़ेगी और जिम्मेदारी तय होगी।


