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    भोपाल में पेयजल पर सवाल: टंकियों के निरीक्षण में गंदगी मिली, बड़े तालाब से जुड़ा मामला उजागर

    बरखेड़ा पठानी की टंकी में गंदगी मिलने से मचा हंगामा

    भोपाल में पेयजल व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक दल शहर की विभिन्न पानी की टंकियों का निरीक्षण करने पहुंचा। इस दौरान बरखेड़ा पठानी क्षेत्र की पानी की टंकी में गंदगी मिलने का आरोप लगाया गया, जिसे लेकर मौके पर हंगामा भी देखने को मिला।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि टंकी के आसपास सफाई की स्थिति बेहद खराब है और अंदर जमा गंदगी से पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उनका आरोप है कि इसी पानी की सप्लाई स्थानीय लोगों के घरों तक की जा रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। निरीक्षण के दौरान स्थानीय रहवासियों ने भी शिकायत की कि उन्हें कई बार बदबूदार और मटमैला पानी मिल चुका है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

    श्यामला हिल्स फिल्टर प्लांट का पानी बड़े तालाब में मिलने पर सवाल

    कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने श्यामला हिल्स स्थित फिल्टर प्लांट का भी निरीक्षण किया। यहां आरोप लगाया गया कि फिल्टर प्लांट से निकलने वाला पानी सीधे बड़े तालाब में मिलते हुए देखा गया, जिससे जल स्रोत की शुद्धता पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि फिल्टर प्लांट से निकलने वाला पानी बिना उचित जांच और मानकों के तालाब में मिल रहा है, तो इससे पूरे शहर की जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। बड़े तालाब से ही भोपाल के एक बड़े हिस्से को पेयजल मिलता है, ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। उन्होंने इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

    नगर निगम और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

    निरीक्षण के बाद कांग्रेस नेताओं ने नगर निगम और जल आपूर्ति से जुड़े विभागों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि शहरवासियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि सभी पानी की टंकियों और फिल्टर प्लांट का नियमित निरीक्षण हो, सफाई व्यवस्था सुधारी जाए और पानी की गुणवत्ता की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आरोपों की जांच कराई जाएगी और यदि कहीं कमी पाई जाती है तो सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। यह मामला एक बार फिर भोपाल की जल आपूर्ति व्यवस्था और उसकी निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है, जिसे नजरअंदाज करना शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

    Sanjay
    Author: Sanjay

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