भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इलाज के दौरान ढाई महीने की मासूम बच्ची की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि न केवल इलाज में लापरवाही बरती गई, बल्कि शिकायत करने पर स्टाफ ने उनसे बदसलूकी भी की। इस घटना ने राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लाज में लापरवाही का आरोप
परिजनों के अनुसार, बच्ची की तबीयत खराब होने पर उसे हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरू में इलाज में देरी हुई और डॉक्टरों ने गंभीरता नहीं दिखाई। जब परिजनों ने बार-बार आग्रह किया तब जाकर बच्ची को इलाज मिला, लेकिन तब तक स्थिति बिगड़ चुकी थी।
परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते सही इलाज किया जाता तो मासूम की जान बचाई जा सकती थी। इस बीच बच्ची की हालत और खराब होती गई और अंततः उसने दम तोड़ दिया।
स्टाफ पर बदसलूकी के आरोप
बच्ची की मौत के बाद जब परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से सवाल किए, तो कथित तौर पर स्टाफ ने उनसे बदसलूकी की। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल कर्मियों ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें चुप कराने की कोशिश की। इस रवैये से गुस्साए परिजन अस्पताल परिसर में ही विरोध करने लगे और न्याय की मांग की।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। परिजनों ने लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
हमीदिया अस्पताल में मासूम की मौत ने राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है। परिजनों के आरोप यदि सही साबित होते हैं तो यह न केवल लापरवाही का मामला है, बल्कि संवेदनहीनता और गैर-जिम्मेदारी का भी उदाहरण है।
जरूरत है कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए और दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों व स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही, अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार कर मरीजों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की सख्त जरूरत है।


