गैस पीड़ितों की रैली हर साल होती है, लेकिन इस बार विवाद नया
भोपाल में हर वर्ष गैस पीड़ित संगठन त्रासदी की बरसी पर प्रदर्शन और रैली निकालते हैं। इस बार भी हजारों प्रभावित परिवारों ने न्याय और पुनर्वास की मांग के साथ रैली में हिस्सा लिया।

रैली के दौरान कई प्रतीकात्मक पुतले, बैनर और पोस्टर लगाए गए थे, जिनके माध्यम से संगठनों ने सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाया।
इसी बीच एक पुतले पर खाकी शॉर्ट्स और सफेद शर्ट जैसी वेशभूषा दिखाई दी, जिसे कुछ समूहों ने RSS की यूनिफॉर्म जैसा बताया। इसके बाद सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल हो गईं और विवाद तेजी से बढ़ गया।
RSS समर्थक संगठनों ने जताया विरोध, कहा— ‘जानबूझकर किया गया अपमान’
विवाद सामने आने के बाद कई हिंदू संगठनों और RSS से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
उनका कहना है कि गैस त्रासदी जैसे संवेदनशील मुद्दे का इस्तेमाल किसी वैचारिक संगठन के खिलाफ प्रोपेगेंडा के लिए नहीं होना चाहिए।
कुछ संगठनों ने इसे “निंदनीय और भड़काने वाली हरकत” बताया और कहा कि ऐसे कृत्यों से सामाजिक माहौल खराब होता है।
कई कार्यकर्ता थाने तक पहुंचे और आयोजकों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की मांग की। हालांकि पुलिस ने अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं की है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
आयोजकों का पक्ष— ‘पुतला RSS का नहीं, कॉर्पोरेट प्रबंधन का प्रतीक’
विवाद बढ़ने पर गैस पीड़ित संगठनों ने प्रेसवार्ता करके अपना पक्ष रखा।
आयोजकों ने कहा कि पुतला किसी राजनीतिक या वैचारिक संगठन की वर्दी का प्रतीक नहीं था।
उनके अनुसार—
“पुतला उन कॉर्पोरेट कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है जिन्हें हम त्रासदी के लिए जिम्मेदार मानते हैं। इसकी वेशभूषा का RSS से कोई संबंध नहीं है। यह महज एक संयोग है कि उसका रंग किसी अन्य पोशाक से मिलता-जुलता लगा।”
उन्होंने कहा कि हमारा मुद्दा गैस पीड़ितों के पुनर्वास, मुआवजे और न्याय से जुड़ा है, न कि किसी संगठन को निशाना बनाने से।
पुलिस और प्रशासन की निगरानी, सोशल मीडिया पर जांच शुरू
विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने रैली के पुतलों और बैनरों की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस साइबर सेल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों की सत्यता की पड़ताल कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी समूह को भड़काने, अपमानित करने या साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की गई होगी, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस शहर के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा रही है।
राजनीतिक दल भी कूदे, आरोप-प्रत्यारोप तेज
बढ़ते विवाद के बीच राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर सामने आ गए हैं।
कुछ नेताओं ने इसे “सोची-समझी साजिश” बताया, जबकि विपक्ष का कहना है कि सरकार मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इसे बड़ा बना रही है।
फिलहाल यह मामला और बढ़ सकता है, क्योंकि गैस पीड़ित संगठनों ने कहा है कि वे अपनी आवाज और तेज करेंगे।


