दस साल में बढ़े निर्माण, पर्यावरण पर खतरा
भोपाल के बड़ा तालाब और उसके कैचमेंट एरिया में पिछले दस वर्षों में सैकड़ों नए निर्माण सामने आए हैं। ये निर्माण पर्यावरणीय नियमों के विपरीत बताए जा रहे हैं, जिससे तालाब की जल गुणवत्ता और जलस्तर पर असर पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कैचमेंट एरिया में पक्के निर्माण और अतिक्रमण से वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होता है। इससे तालाब में गाद जमाव और प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है। स्थानीय पर्यावरण समूहों ने समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन ठोस कार्रवाई में देरी होती रही।
सांसद-कलेक्टर की फटकार के बाद तेज हुई कार्रवाई
हाल ही में भोपाल सांसद और कलेक्टर की सख्त फटकार के बाद प्रशासन ने फिर से कार्रवाई शुरू की है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि कैचमेंट क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों की सूची तैयार कर कानूनी कार्रवाई की जाए। अधिकारियों ने मौके पर निरीक्षण कर कुछ स्थानों पर नोटिस भी जारी किए हैं। प्रशासन का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और जलस्रोतों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। इस कदम को लेकर स्थानीय नागरिकों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
टास्क फोर्स रखेगी निगरानी, दीर्घकालिक योजना पर जोर
अब कैचमेंट एरिया की निगरानी के लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित की गई है। यह टीम नियमित निरीक्षण करेगी और किसी भी नए अवैध निर्माण पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। साथ ही, ड्रोन सर्वे और सैटेलाइट मैपिंग जैसी तकनीकों के उपयोग पर भी विचार किया जा रहा है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि केवल अतिक्रमण हटाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संरक्षण योजना भी बनाई जाएगी। बड़ा तालाब भोपाल की पहचान और जल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है, इसलिए इसकी सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि प्रशासन की यह सख्ती कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या कैचमेंट एरिया को पूरी तरह संरक्षित किया जा सकेगा।


