सिंगल बेंच के आदेश पर डिवीजन बेंच का हस्तक्षेप
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने भोपाल नगर निगम के कमिश्नर के खिलाफ चल रही अवमानना कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह रोक हाईकोर्ट की सिंगल बेंच द्वारा पारित उस आदेश पर लगाई गई है, जिसमें निगम कमिश्नर के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। डिवीजन बेंच ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद सिंगल बेंच के आदेश पर स्टे देते हुए आगे की कार्रवाई पर अस्थायी विराम लगा दिया।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, यह मामला एक पूर्व आदेश के पालन से जुड़ा है, जिसे लेकर सिंगल बेंच ने असंतोष जताया था। आरोप था कि संबंधित आदेश का समय पर और पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया, जिसके चलते निगम कमिश्नर के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद निगम कमिश्नर की ओर से डिवीजन बेंच में अपील दायर की गई, जिसमें सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी गई थी। अपील में तर्क दिया गया कि आदेश के पालन को लेकर स्थिति को सही तरीके से नहीं समझा गया और प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं।
अगली सुनवाई 18 फरवरी को
डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को तय की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तब तक निगम कमिश्नर के खिलाफ अवमानना से जुड़ी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही, संबंधित पक्षों को जवाब और दस्तावेज पेश करने के लिए समय दिया गया है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन से जुड़े अहम सवाल खड़े करता है। वहीं, निगम प्रशासन की ओर से राहत की सांस ली गई है, क्योंकि स्टे लगने से फिलहाल अवमानना की कार्रवाई पर विराम लग गया है।
अब सभी की नजरें 18 फरवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि सिंगल बेंच का आदेश बहाल रहेगा या डिवीजन बेंच कोई अलग दिशा तय करेगी। यह फैसला न केवल इस मामले के लिए, बल्कि भविष्य में प्रशासनिक मामलों में अदालत और अधिकारियों के संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


