तीन जिलों में एससी, बाकी में ओबीसी दर्जा—उठे सवाल
भोपाल में रजक समाज के लोगों ने वर्गीकरण को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रदेश के तीन जिलों में उन्हें अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा मिला हुआ है, जबकि शेष 52 जिलों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल किया गया है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह क्षेत्रीय भिन्नता सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर असमानता पैदा कर रही है। उनका तर्क है कि एक ही समुदाय के लोगों को अलग-अलग जिलों में अलग दर्जा दिए जाने से शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती है। इसी असमानता को समाप्त करने के लिए समाज एक समान दर्जे की मांग कर रहा है।
क्षेत्रीय बंधन हटाने की मांग तेज
रजक समाज के नेताओं ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में क्षेत्रीय बंधन होने से कई परिवारों को आरक्षण और अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रदेश में एक समान वर्गीकरण लागू किया जाए, ताकि समुदाय के लोगों को समान अधिकार मिल सकें। प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन सौंपकर सरकार से इस मुद्दे पर जल्द निर्णय लेने की अपील की गई। समाज के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि वे लंबे समय से इस मांग को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी।
सरकार से वार्ता की उम्मीद, आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि अधिकारों की समानता सुनिश्चित करना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्गीकरण से जुड़े मुद्दे संवेदनशील होते हैं और सरकार को कानूनी व संवैधानिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना होगा। फिलहाल प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार कर संबंधित विभागों को अवगत कराने की बात कही है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि इस मुद्दे पर क्या निर्णय लिया जाता है और क्या रजक समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो पाती है।


