बंगाल में मस्जिद की नींव रखने पर गुस्सा, भोपाल में शुरू हुआ विरोध
बंगाल में बाबरी मस्जिद के नाम पर नई मस्जिद की नींव रखे जाने की खबर जैसे ही मध्यप्रदेश पहुँची, भोपाल में कई हिंदू संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बाबर के नाम पर दोबारा मस्जिद का निर्माण हिंदू समाज की आस्था को ठेस पहुँचाने वाला कदम है।
उनका कहना था कि अयोध्या में वर्षों की कानूनी लड़ाई और संघर्ष के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है, ऐसे में किसी भी राज्य में बाबरी मस्जिद नाम का इस्तेमाल भड़काऊ माहौल तैयार कर सकता है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने इस कदम को राजनीतिक और धार्मिक संतुलन बिगाड़ने वाला बताया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए बंगाल सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की और कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो विरोध और तेज किया जाएगा।
धरना-प्रदर्शन के दौरान पुलिस से हुई धक्का-मुक्की, तनावपूर्ण माहौल
विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी अचानक पुलिस बैरिकेड्स को पार करने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर और झंडे लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिससे माहौल कुछ देर के लिए और गर्म हो गया। पुलिस ने स्थिति को काबू में करने के लिए अतिरिक्त बल बुलाया और सभी प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान पर ही रुकने के आदेश दिए। हालांकि झूमाझटकी में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन पुलिस की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए गए। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पुलिस ने उनकी आवाज दबाने की कोशिश की और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को जबरन रोकने का प्रयास किया। इस पूरे घटनाक्रम के कारण कुछ समय के लिए ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ।
हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी: बाबर के नाम पर मस्जिद बर्दाश्त नहीं
प्रदर्शन के अंत में हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि बाबर के नाम पर किसी भी प्रकार का धार्मिक ढांचा निर्माण किसी भी राज्य में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि बाबर आक्रमणकारी था और उसके नाम पर मस्जिद का निर्माण भारतीय सांस्कृतिक भावनाओं के प्रतिकूल है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बंगाल सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं करती, तो वे देशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे। प्रतिनिधियों ने कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक अस्मिता का प्रतीक है। उन्होंने केन्द्र सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने आगे की रणनीति पर विचार करने के लिए जल्द ही बैठक बुलाने की घोषणा की।


