
भोपाल में निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। फर्जी मार्कशीट/शैक्षणिक दस्तावेज से जुड़े एक अंतरराज्यीय मामले में राजस्थान से आई STF टीमों ने राजधानी के अलग-अलग इलाकों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। जांच का फोकस RKDF University से जुड़े रिकॉर्ड्स और प्रक्रियाओं पर है।
अचानक कार्रवाई, परिसर में गतिविधियां रोकी गईं
सूत्रों के अनुसार, भोपाल में यह ऑपरेशन पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। टीमों के पहुंचते ही कैंपस के प्रवेश बिंदुओं पर आवाजाही नियंत्रित कर दी गई। कर्मचारियों से जुड़े रिकॉर्ड्स की जांच शुरू हुई और कुछ समय के लिए छात्रों की एंट्री भी रोकी गई – जिससे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
क्यों हुई छानबीन?
राजस्थान में दर्ज एक केस की जांच के दौरान कथित फर्जी मार्कशीट/प्रमाणपत्र के सुराग सामने आए थे। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर STF ने भोपाल आकर विश्वविद्यालय परिसर, एक शाखा कार्यालय और प्रबंधन से जुड़े ठिकानों पर दस्तावेज़ी और डिजिटल ऑडिट शुरू किया।
क्या-क्या खंगाला गया?
- विभागीय फाइलें और रजिस्टर
- कंप्यूटर सिस्टम/डिजिटल डेटा
- एडमिशन, परीक्षा और सत्यापन से जुड़े रिकॉर्ड्स
एक टीम ने प्रबंधन से जुड़े आवास पर भी जाकर पूछताछ और दस्तावेज़ सत्यापन किया। पुलिस बल की मौजूदगी के चलते आसपास के इलाकों में भी हलचल रही।
आधिकारिक बयान पर सन्नाटा
कार्रवाई के दौरान STF अधिकारियों ने मीडिया से दूरी बनाए रखी। संकेत दिए गए हैं कि जांच पूरी होने के बाद ही औपचारिक जानकारी साझा की जाएगी। फिलहाल, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाज़ी माना जा रहा है।
शिक्षा तंत्र पर असर?
इस कार्रवाई ने निजी उच्च शिक्षा संस्थानों में डिग्री सत्यापन, परीक्षा नियंत्रण और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों को फिर से केंद्र में ला दिया है। जानकारों का मानना है कि जांच का दायरा आगे अन्य संस्थानों तक भी बढ़ सकता है।
आगे क्या?
जांच के निष्कर्षों के आधार पर रिकवरी, जवाबदेही तय करने और कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। तब तक प्रशासन ने सभी पक्षों से सहयोग की अपील की है।


