
मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चला आ रहा असंतोष अब आक्रोश में बदलता दिख रहा है। हाईकोर्ट के ताज़ा फैसले के बाद कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने आदेश तुरंत लागू करने या आंदोलन झेलने की धमकी दी है।
क्या है पूरा मामला?
जबलपुर स्थित Madhya Pradesh High Court ने 2019 में लागू उस सरकारी व्यवस्था को असंवैधानिक करार दिया है, जिसमें नव-नियुक्त कर्मचारियों को पहले तीन वर्षों तक पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा था। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कर्मचारी से पूरा काम लिया जा रहा है, तो वेतन भी पूरा मिलना चाहिए।
कोर्ट ने न सिर्फ यह व्यवस्था रद्द की, बल्कि पिछले वर्षों में वेतन से की गई कटौती की पूरी रकम लौटाने के निर्देश भी दिए हैं।
सरकार पर दबाव
फैसले के बाद भोपाल में कर्मचारी संगठनों ने प्रेस वार्ता कर सरकार से तुरंत आदेश जारी करने की मांग की। उनका कहना है कि यह फैसला सिर्फ याचिकाकर्ताओं तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के सभी प्रभावित कर्मचारियों पर लागू किया जाए।
कर्मचारी मंच के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि वर्षों तक कर्मचारियों की शिकायतें अनसुनी की गईं, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक नुकसान झेलना पड़ा।
“पूरा काम, आधा वेतन” नहीं चलेगा
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में साफ कहा कि:
- समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू होगा
- प्रोबेशन के नाम पर मनमानी कटौती गलत है
- वेतन रोकना या घटाना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है
इस फैसले को कर्मचारी संगठनों ने नज़ीर बताया है, जो आगे आने वाले मामलों की दिशा तय करेगा।
आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारी मंच ने दो टूक कहा है कि अगर सरकार ने जल्द स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए, तो भोपाल में मंत्रालय का घेराव किया जाएगा और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संगठनों का कहना है कि अब वे सिर्फ आश्वासन नहीं, लिखित आदेश चाहते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर अब सबकी नजर Mohan Yadav सरकार के अगले कदम पर टिकी है।


