मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। राज्य के वन मंत्री विजय शाह के कथित तौर पर लापता हो जाने पर इंदौर कांग्रेस ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया है। शहर के कई चौराहों, दीवारों और सार्वजनिक स्थानों पर गुमशुदगी के पोस्टर चिपका दिए गए हैं, जिनमें विजय शाह को खोजकर लाने वाले को 11,000 रूपए इनाम देने की घोषणा की गई है।

क्या है मामला?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब मंत्री विजय शाह ने सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर एक आपत्तिजनक बयान दिया। बयान के बाद से न केवल सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई गई, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी विरोध शुरू हो गया। कांग्रेस का आरोप है कि बयान के बाद से मंत्री अचानक गायब हो गए हैं, न ही कैबिनेट बैठक में नजर आए, न ही सार्वजनिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस का आरोप: “सरकार मंत्री को बचा रही है”
जिला कांग्रेस सेवादल के कार्यवाहक अध्यक्ष विवेक खंडेलवाल ने आरोप लगाया, “बयान के बाद मंत्री नदारद हैं। उनकी मौजूदगी न कैबिनेट में है, न जनता के बीच। लगता है भाजपा और प्रशासन उन्हें छिपा रहे हैं।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा, प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि उनकी नसों में सिंदूर दौड़ता है, लेकिन आज देश की रगों में मंत्री का बयान दौड़ रहा है।
पोस्टर में क्या लिखा है?
कांग्रेस द्वारा लगाए गए पोस्टरों में लिखा गया है:
गुमशुदा की तलाश! मंत्री कुंवर विजय शाह को ढूंढकर लाने वाले को ₹11,000 का उचित इनाम दिया जाएगा।
पोस्टरों में मंत्री की तस्वीर भी शामिल है और कांग्रेस ने साफ किया है कि जब तक विजय शाह इस्तीफा नहीं देंगे, आंदोलन चलता रहेगा।
मंत्री का माफी वाला वीडियो
विवाद बढ़ने के बाद मंत्री विजय शाह ने एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा:
मेरी बातों से अगर किसी को ठेस पहुंची हो तो मैं माफी मांगता हूं। यह मेरी भाषाई भूल थी। मैं बहन सोफिया कुरैशी और देशवासियों से हाथ जोड़कर क्षमा चाहता हूं।
28 मई तक राहत, एसआईटी करेगी जांच
मंत्री को 28 मई तक गिरफ्तारी से राहत मिल गई है। कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) गठित करने का आदेश दिया है। इस दौरान उनकी गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।
बीजेपी सूत्रों के अनुसार, जब तक कोर्ट गिरफ्तारी का आदेश नहीं देता, मंत्री के इस्तीफे की कोई जरूरत नहीं है। वहीं कांग्रेस ने कहा है कि वे मंत्री के इस्तीफे तक विरोध जारी रखेंगे।
अब 28 मई को आने वाली एसआईटी रिपोर्ट पर सबकी नजरें टिकी हैं, जो तय करेगी कि विजय शाह की सियासी कुर्सी बचेगी या जाएगी।
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