भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट की ऑरेंज लाइन फेज-2 पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जहां कांग्रेस विधायक आतिफ अकील शाही ने शाही कब्रिस्तान से गुजरने वाले भूमिगत रूट का कड़ा विरोध किया है। यह विवाद मेट्रो के विस्तार को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि पहले ही यात्रियों की कमी जैसी समस्याएं हैं।

विवाद का मुख्य कारण
ऑरेंज लाइन का फेज-2 सुभाष नगर से करोंद तक 16.74 किलोमीटर लंबा है, जिसमें 5.38 किलोमीटर एलिवेटेड (6 स्टेशन, लागत ~650 करोड़ रुपये) और 3.39 किलोमीटर अंडरग्राउंड (2 स्टेशन, लागत ~890 करोड़ रुपये) हिस्सा शामिल है। समस्या भोपाल टॉकीज के पास शाही कब्रिस्तान से भूमिगत रूट की है, जिसे विधायक ने “बुजुर्गों को चैन से सोने दो” कहकर खारिज किया। शाही वक्फ बोर्ड ने कोर्ट में केस दायर कर स्टे लिया, और अब मध्य प्रदेश वक्फ अधिकरण, वक्फ सदस्य आजम खान व मेट्रो अधिकारियों की बैठक हो चुकी है।
विधायक व अन्य विरोध
कांग्रेस विधायक आतिफ अकील (उत्तरी भोपाल) ने कब्रिस्तान के नीचे मेट्रो पटरी बिछाने पर नाराजगी जताई, जो राजनीतिक रंग ले चुका है। इससे पहले सांसद आलोक शर्मा ने ब्लू लाइन के एलिवेटेड रूट (भदभदा-रत्नागिरी) पर आपत्ति कर अंडरग्राउंड की मांग की थी। वक्फ बोर्ड ने रूट बदलने की मांग की है।
प्रोजेक्ट की स्थिति
फेज-2 का निर्माण तेजी से चल रहा है, लेकिन विवादों ने ब्रेक लगा दिया। पहले चरण में कुछ रूट साफ हो चुके हैं, मगर कब्रिस्तान मुद्दा अब कोर्ट व मीटिंग्स में अटका है। भोपाल मेट्रो कुल मिलाकर विवादों व कम यातायात से जूझ रही है।


