देश के सबसे खौफनाक सीरियल किलर में से एक, ‘डॉक्टर डेथ’ के नाम से कुख्यात देवेंद्र शर्मा को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राजस्थान के दोसा जिले से फिर से गिरफ्तार कर लिया है। आयुर्वेदिक डॉक्टर से खूनी बने शर्मा पर 125 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट और 50 से अधिक हत्याओं का आरोप है।

2013 में उम्रकैद की सजा पाने के बाद देवेंद्र शर्मा तिहाड़ जेल में बंद था, लेकिन 2023 में पैरोल पर बाहर आने के बाद फरार हो गया। दो साल तक फरारी के बाद पुलिस ने उसे दोसा जिले के एक आश्रम से पुजारी के वेश में दबोच लिया।
कैसे बना ‘डॉक्टर डेथ’?
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ निवासी देवेंद्र शर्मा ने 1984 में आयुर्वेद में स्नातक (BAMS) की डिग्री प्राप्त की थी और राजस्थान के बांदीकुई में ‘जनता क्लिनिक’ नामक आयुर्वेदिक क्लिनिक चलाते थे। लेकिन 1994 में एक गैस एजेंसी घोटाले में आर्थिक नुकसान के बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा।
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शुरुआत नकली गैस एजेंसी और फिर अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट से हुई, लेकिन जल्दी ही वह सीरियल किलिंग की ओर बढ़ गया।
हत्या का तरीका रोंगटे खड़े कर देने वाला
2002 से 2004 के बीच शर्मा ने अपने साथियों के साथ मिलकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में टैक्सी और ट्रक चालकों को फर्जी सवारी के बहाने बुलाकर हत्या की। वाहन बेचने के बाद वह लाशों को कासगंज की हजारा नहर में फेंक देता, जहां मगरमच्छ उन्हें खा जाते थे, जिससे कोई सबूत नहीं बचता।
पूछताछ में शर्मा ने माना कि “50 हत्याओं के बाद मैंने गिनती बंद कर दी थी।” पुलिस को संदेह है कि असली संख्या 100 से भी अधिक हो सकती है।
125 किडनी ट्रांसप्लांट, 5-7 लाख प्रति ऑपरेशन
देवेंद्र शर्मा ने 1994 से 2004 के बीच गुरुग्राम के एक डॉक्टर अमित के साथ मिलकर 125 से ज्यादा अवैध किडनी ट्रांसप्लांट करवाए।
हर एक ट्रांसप्लांट के बदले उसे ₹5 से ₹7 लाख मिलते थे। वह गरीबों और मजबूरों को बहला-फुसलाकर डोनर बनवाता था, और कई बार जबरदस्ती भी की जाती थी।
2004 में गुरुग्राम पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, जिसके बाद कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
पुलिस की बड़ी कामयाबी
फरार होने के बाद देवेंद्र शर्मा राजस्थान के दोसा जिले के एक आश्रम में पुजारी बनकर छिपा हुआ था। दिल्ली पुलिस को जैसे ही उसकी लोकेशन का सुराग मिला, उन्होंने तुरंत दबिश दी और उसे गिरफ्तार कर लिया।
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने इसे एक बड़ी सफलता बताया है और कहा है कि ऐसे अपराधी को समाज से दूर रखना ही न्याय है।
न्याय प्रणाली के लिए एक चेतावनी
देवेंद्र शर्मा का केस भारतीय न्याय प्रणाली के लिए एक गहरी चेतावनी है कि कैसे पैरोल का दुरुपयोग करके एक खूंखार अपराधी फिर से समाज में घुलमिल गया। अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि उसे पैरोल देने में लापरवाही कैसे हुई?
यह केस सिर्फ अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे एक पढ़ा-लिखा इंसान, जिसने चिकित्सा को अपना पेशा चुना था, लालच और अपराध की दलदल में ऐसा फंसा कि उसका नाम ही ‘डॉक्टर डेथ’ बन गया।
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