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    भोपाल के हमीदिया अस्पताल में फिर विवाद : मृत घोषित नवजात में हरकत के दावे, जांच शुरू

    Hamidia Hospital Bhopal News : भोपाल के हमीदिया अस्पताल में नवजात को मृत घोषित किए जाने के बाद उसके शरीर में हलचल दिखने के दावे ने गंभीर विवाद खड़ा कर दिया है। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि डॉक्टरों ने इसे जटिल मेडिकल स्थिति बताया है। फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

    मृत घोषित करने के बाद दिखी हरकत

    परिवार के अनुसार, डिलीवरी के कुछ समय बाद डॉक्टरों ने नवजात बच्ची को मृत घोषित कर दिया और रात में मृत्यु प्रमाण पत्र भी सौंप दिया। परिजनों का कहना है कि करीब चार घंटे बाद, जब बच्ची के पिता एनआईसीयू पहुंचे, तो उन्होंने नवजात के शरीर में हलचल और सांस जैसी गतिविधि देखी। इस घटना का वीडियो भी परिवार द्वारा बनाए जाने का दावा किया गया है, जिसके बाद उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से सवाल उठाए।

    डॉक्टरों बोलै बेहद जटिल और प्रीमेच्योर केस

    अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, नवजात का जन्म समय से पहले हुआ था और उसका वजन मात्र करीब 450 ग्राम था। शुरुआती जांच में हार्टबीट नहीं मिली थी। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में कभी-कभी शरीर में हलचल जैसी प्रतिक्रिया दिखाई दे सकती है, लेकिन जीवित रहने की संभावना अत्यंत कम होती है।

    तीन अस्पतालों से रेफर होकर पहुंची थी महिला

    जानकारी के मुताबिक, रायसेन जिले के बरेली निवासी एक व्यक्ति अपनी गर्भवती पत्नी को पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले गया था। वहां से महिला को जिला अस्पताल और फिर हमीदिया अस्पताल रेफर किया गया। महिला की हालत गंभीर थी और गर्भावस्था भी केवल 5-6 महीने की थी, जिससे मामला और जटिल हो गया।

    लापरवाही के आरोप और विवाद

    परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल स्टाफ ने उन्हें सही जानकारी नहीं दी और सवाल पूछने पर जवाब देने से बचते रहे। उनका यह भी कहना है कि वीडियो बनाने से रोकने की कोशिश की गई, जिससे मौके पर विवाद की स्थिति बन गई।

    मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ से जवाब माँगा है और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। सीनियर डॉक्टरों का कहना है कि नवजात को कुछ और समय तक निगरानी में रखा जा सकता था, लेकिन जल्दबाजी में मृत घोषित किए जाने से भ्रम की स्थिति बनी।

    ‘Abortus’ केस बताकर दी गई सफाई

    डॉक्टरों ने परिजनों को समझाते हुए बताया कि यह एक “Abortus” केस था, जिसमें शिशु का जन्म 20 सप्ताह से पहले या 500 ग्राम से कम वजन के साथ होता है। ऐसे मामलों में शिशु पूरी तरह विकसित नहीं होता और उसके जीवित रहने की संभावना बेहद कम होती है, हालांकि कुछ समय तक हलचल दिख सकती है।

    दोषी पाए जाने पर कार्रवाई

    स्त्री एवं प्रसूति विभाग की प्रमुख डॉ. शबाना सुल्तान ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    Suyash Gupta
    Author: Suyash Gupta

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