भोपाल के यूनियन कार्बाइड परिसर, जो 1984 गैस त्रासदी का साक्षी रहा, अब नए स्वरूप में विकसित होगा। राज्य सरकार यहां ₹400 करोड़ की लागत से ओपन थिएटर, रिहायशी-व्यावसायिक परिसर और अनुसंधान केंद्र बनाएगी।

विकास योजना क्या है?
परिसर में 10 एकड़ क्षेत्र में गैस पीड़ितों की स्मृति में भव्य स्मारक भी बनेगा। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देगी। योजना को हाल ही में मंजूरी मिली है।
ऐतिहासिक महत्व क्या है?
1984 की भोपाल गैस कांड के बाद बंद पड़े इस परिसर को अब आधुनिक रूप दिया जाएगा। स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवारों की मांग लंबे समय से थी।
क्या प्रभाव होगा?
यह विकास भोपाल को नई पहचान देगा और आर्थिक गतिविधियां बढ़ाएगा। सरकार का लक्ष्य स्मृति को जीवंत रखते हुए प्रगति सुनिश्चित करना है।


