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मध्यप्रदेश राज्य संग्रहालय में इतिहास का डिजिटलीकरण : पहली बार 33,000 प्राचीन सिक्कों का 3डी डॉक्यूमेंटेशन शुरू

पुरातत्व विभाग की अनोखी पहल, 3डी तकनीक से सहेजा जाएगा प्राचीन धरोहरों का खजाना 

भोपाल। मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राजधानी भोपाल स्थित मध्यप्रदेश राज्य संग्रहालय में पहली बार 33,000 से अधिक प्राचीन सिक्कों का 3डी डॉक्यूमेंटेशन शुरू किया गया है।
यह परियोजना राज्य पुरातत्व विभाग और तकनीकी विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास से संचालित की जा रही है। उद्देश्य है कि आने वाली पीढ़ियाँ डिजिटल रूप में भी इन सिक्कों का अध्ययन और अवलोकन कर सकें।

संग्रहालय में मौजूद ये सिक्के मौर्य, गुप्त, कुषाण, मुगल और ब्रिटिश काल के हैं, जिनमें से कई अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। 3डी स्कैनिंग के माध्यम से इन सिक्कों की बनावट, लिपि, प्रतीक और धातु संरचना को सुरक्षित डिजिटल प्रारूप में संरक्षित किया जाएगा।

सिक्कों की हर बारीकी को कैद करेगी 3डी तकनीक

संग्रहालय अधिकारियों के अनुसार, 3डी डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया में प्रत्येक सिक्के को हाई-रेज़ोल्यूशन स्कैनर से स्कैन किया जा रहा है। इस तकनीक से सिक्कों की सतह की हर सूक्ष्म बारीकी – जैसे अंकन, प्रतीक, राजचिह्न, और क्षरण के निशान – डिजिटल रूप में सुरक्षित किए जा रहे हैं। पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रयास न केवल सिक्कों की संरक्षण प्रक्रिया को आधुनिक बनाएगा, बल्कि शोधकर्ताओं को भी इन सिक्कों के अध्ययन में नई सुविधा प्रदान करेगा।

राज्य संग्रहालय की निदेशक ने बताया कि इस प्रक्रिया के बाद इन सिक्कों का एक डिजिटल संग्रह (Virtual Coin Gallery) तैयार किया जाएगा, जिसे भविष्य में ऑनलाइन प्रदर्शनी के रूप में जनता के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने कहा, “3डी तकनीक हमें इतिहास की उन झलकियों तक पहुंचने का अवसर देती है, जिन्हें आम आंखों से देख पाना मुश्किल होता है। यह संग्रहालय के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।”

पहला राज्य जहां इतनी बड़ी संख्या में सिक्कों का 3डी रिकॉर्ड तैयार होगा

राज्य पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना देश में अपनी तरह की पहली पहल है। इतने बड़े पैमाने पर प्राचीन सिक्कों का डिजिटल और 3डी दस्तावेजीकरण किसी भी अन्य राज्य संग्रहालय में अब तक नहीं हुआ है।
इस प्रोजेक्ट के माध्यम से प्रत्येक सिक्के का यूनिक डिजिटल आईडी नंबर भी बनाया जा रहा है, जिससे भविष्य में उसकी पहचान, प्रमाणिकता और संरक्षण आसान होगा।

अधिकारियों ने बताया कि यह प्रक्रिया न केवल ऐतिहासिक विरासत को सहेजने का माध्यम बनेगी, बल्कि इससे पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में भी नई संभावनाएँ खुलेंगी। विश्वविद्यालयों और इतिहास विभागों के छात्र इस डिजिटल डेटा के माध्यम से सिक्कों के काल, धातु संरचना, राजवंशीय प्रभाव और मुद्रा प्रणाली का अध्ययन कर सकेंगे।

जहाँ पहले सिक्कों का अध्ययन केवल प्रदर्शन या पुस्तकों तक सीमित था, वहीं अब यह परियोजना उन्हें डिजिटल युग में ले आई है। 33,000 प्राचीन सिक्कों का यह डिजिटल खजाना न केवल प्रदेश बल्कि देश की सांस्कृति

Sanjay
Author: Sanjay

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