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डे-केयर में बच्चों के साथ क्रूरता: 13 आरोपी गिरफ्तार, CCTV फुटेज से सामने आई बच्चों को बांध कर रखने की बात

छोटे बच्चों की देखभाल के लिए बनाए गए इंडोनेशिया के योग्यकार्ता डे-केयर सेंटर से जुड़ा ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगो को झकझोर कर रख दिया है। यहां कथित रूप से मासूम बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार किए जाने के आरोप लगे हैं। मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर कुछ CCTV फुटेज वायरल हुए, जिनमें बच्चों की हालत देखकर लोगों में गुस्सा फ़ैल रहा है।

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में 11 केयरटेकर, सेंटर का प्रमुख और संस्था संचालक शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, सभी पर बच्चों के साथ लापरवाही और दुर्व्यवहार से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं, और जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।

डे-केयर में बच्चों के साथ क्रूरता! 13 गिरफ्तार, CCTV ने खोली पोल | Viral Video देखे

वायरल CCTV फुटेज में जो दृश्य सामने आए, वे बेहद परेशान करने वाले हैं। वीडियो में कई छोटे बच्चे, जिनकी उम्र दो साल से भी कम बताई जा रही है, फर्श पर पड़े दिखाई दिए। कई बच्चों के हाथ-पैर कपड़ों से बांधे गए थे और उन्हें एक छोटे से कमरे में एक साथ रखा गया था। पुलिस ने इन फुटेज को असली बताया है, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि डे-केयर सेंटर में जरूरत से ज्यादा बच्चों को रखा जा रहा था। जानकारी के मुताबिक, करीब 100 बच्चों को इस सेंटर में रखा जाता था, जिनमें से आधे से ज्यादा के साथ किसी न किसी प्रकार के दुर्व्यवहार की आशंका जताई जा रही है। एक कमरे में लगभग 20 बच्चों को ठूंसकर रखने की बात भी सामने आई है, जिससे उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर खतरा बना रहा।

पूछताछ में बताए यह

पूछताछ में कुछ आरोपियों ने यह दलील दी कि स्टाफ की कमी के कारण बच्चों को नियंत्रित करने के लिए ऐसा किया गया। हालांकि, पुलिस और सरकारी अधिकारियों ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और यह सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

इस घटना के बाद अभिभावकों में भी भारी गुस्सा और दर्द देखने को मिला है। एक अभिभावक ने बताया कि उनका छोटा बच्चा कई बार बीमार पड़ा और उन्हें अब शक है कि इसका कारण डे-केयर की लापरवाही हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी के शरीर पर पहले चोट के निशान मिले थे, लेकिन तब सेंटर ने इसे नजरअंदाज कर दिया था। अब सच्चाई सामने आने के बाद परिवारों का भरोसा पूरी तरह टूट गया है।

सरकार की ओर से भी इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है। महिला और बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों ने साफ कहा है कि बच्चों के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

क़ानूनी प्रावधान

कानूनी प्रावधानों के तहत आरोपियों को पांच साल तक की सजा और भारी जुर्माना हो सकता है। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए संस्थानों की निगरानी कितनी जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए सख्त नियमों के साथ-साथ नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय करना बेहद आवश्यक है।

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