भोपाल में किसानों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। कई किसान SDM कार्यालय के बाहर डेरा डालकर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। किसानों की मुख्य नाराजगी गेहूं की स्लॉट बुकिंग, जमीन के सीमांकन और अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों को लेकर है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
SDM कार्यालय के बाहर किसानों का जमावड़ा
किसानों ने बड़ी संख्या में SDM कार्यालय के बाहर एकत्र होकर अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। उन्होंने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की। कई किसान सुबह से ही कार्यालय के बाहर बैठे रहे और अधिकारियों से मिलने का इंतजार करते रहे। प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस दौरान क्षेत्र में हलचल का माहौल बना रहा।
गेहूं स्लॉट बुकिंग को लेकर बढ़ी परेशानी
किसानों की प्रमुख शिकायत गेहूं की स्लॉट बुकिंग प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि समय पर स्लॉट नहीं मिलने के कारण उन्हें अपनी फसल बेचने में परेशानी हो रही है। कई किसानों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन सिस्टम में दिक्कतों के कारण उन्हें बार-बार प्रयास करना पड़ता है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के बाद भी यदि समय पर बिक्री नहीं हो पाती, तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से इस प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की मांग की है।
सीमांकन और जमीन अधिग्रहण पर विरोध
इसके अलावा किसानों ने जमीन के सीमांकन और अधिग्रहण को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि कई मामलों में सही तरीके से सीमांकन नहीं किया गया है, जिससे विवाद की स्थिति बन रही है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण के दौरान उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है। उन्होंने मांग की कि उनकी जमीन के बदले उन्हें उचित और न्यायसंगत मुआवजा दिया जाए, ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो।
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज
किसानों ने साफ कहा है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप कर समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की है। प्रशासन की ओर से किसानों को आश्वासन दिया गया है कि उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि किसानों की मांगों को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।


