भोपाल में चयनित शिक्षक-अभ्यर्थियों ने नियुक्ति में हो रही देरी के खिलाफ डीपीआई (लोक शिक्षण संचालनालय) के सामने प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों का कहना है कि चयनित होने के बावजूद पिछले 9 महीनों से उन्हें नियुक्ति नहीं मिली है। इस देरी से नाराज होकर उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और जल्द नियुक्ति आदेश जारी करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
डीपीआई के सामने जुटे अभ्यर्थी
चयनित शिक्षक-अभ्यर्थी बड़ी संख्या में डीपीआई कार्यालय के बाहर एकत्र हुए। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी समस्याएं उठाईं और प्रशासन से जवाब मांगा। कई अभ्यर्थियों ने कहा कि वे लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से रखा। उनका कहना था कि नियुक्ति प्रक्रिया में अनावश्यक देरी उनके भविष्य को प्रभावित कर रही है।
9 महीने से नियुक्ति का इंतजार
अभ्यर्थियों की मुख्य शिकायत यह है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि कई उम्मीदवारों ने नौकरी की उम्मीद में अन्य अवसर भी छोड़ दिए थे। इस लंबे इंतजार के कारण अभ्यर्थियों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई उम्मीदवारों ने बताया कि वे अपने परिवार पर निर्भर हैं और नौकरी न मिलने से उनकी स्थिति कठिन हो गई है।
सरकार से जल्द आदेश जारी करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द नियुक्ति आदेश जारी किए जाएं। उनका कहना है कि देरी से शिक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है, क्योंकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। अभ्यर्थियों का मानना है कि यदि समय पर नियुक्ति हो जाए, तो वे छात्रों को बेहतर शिक्षा दे सकेंगे। उन्होंने प्रशासन से पारदर्शी और तेज प्रक्रिया अपनाने की अपील की है।
चेतावनी: मांगें नहीं मानी गईं तो होगा बड़ा आंदोलन
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन अनदेखी होने पर आंदोलन को तेज किया जाएगा। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि मामले पर विचार किया जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर क्या फैसला लिया जाता है और कब तक उन्हें नियुक्ति मिलती है।


