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भोपाल में 300 परिवारों का दर्द: लाखों रुपए फंसे, 15 साल बाद भी नहीं मिली जमीन

वर्षों पुराना सपना अब भी अधूरा

भोपाल की रोहित हाउसिंग सोसायटी के करीब 300 सदस्य पिछले 15 वर्षों से अपने प्लॉट का इंतजार कर रहे हैं। सदस्यों का आरोप है कि उन्होंने वर्षों पहले सोसायटी में प्लॉट पाने के लिए लाखों रुपये जमा किए थे, लेकिन आज तक उन्हें जमीन का कब्जा नहीं मिल पाया है। लंबे इंतजार के कारण कई परिवारों का अपने घर का सपना अधूरा रह गया है। प्रभावित लोगों का कहना है कि समय के साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हुई है, क्योंकि एक तरफ उनकी जमा पूंजी फंसी हुई है और दूसरी तरफ मकान बनाने का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।

 

लाखों रुपए जमा करने के बावजूद नहीं मिला लाभ

सोसायटी के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत भुगतान किया था और उन्हें उम्मीद थी कि कुछ वर्षों के भीतर प्लॉट आवंटित कर दिए जाएंगे। लेकिन समय बीतने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका। कई सदस्यों ने बताया कि उन्होंने अपनी जीवनभर की बचत और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर निवेश किया था। अब वे लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने और अधिकारियों से गुहार लगाने को मजबूर हैं। लोगों का आरोप है कि मामले में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं।

 

प्रशासन और संबंधित विभागों से लगाई गुहार

परेशान सदस्यों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि इतने लंबे समय तक इंतजार करना किसी भी निवेशक या आम नागरिक के लिए उचित नहीं है। कई सदस्यों ने सामूहिक रूप से अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखी है और जल्द समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्लॉट उपलब्ध नहीं कराए जा सकते तो उन्हें उचित मुआवजा या वैकल्पिक व्यवस्था दी जानी चाहिए। प्रभावित परिवारों का मानना है कि मामले का शीघ्र निराकरण होना आवश्यक है ताकि उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हो सके।

बढ़ती चिंता और भविष्य को लेकर अनिश्चितता

समय बीतने के साथ सदस्यों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। जिन लोगों ने प्लॉट के लिए निवेश किया था, उनमें से कई अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि कुछ वरिष्ठ नागरिकों को अब भी अपने अधिकार का इंतजार है। बढ़ती जमीन की कीमतों और निर्माण लागत ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। कई परिवारों का कहना है कि यदि उन्हें समय पर प्लॉट मिल गया होता तो वे आज अपने घर में रह रहे होते।

रोहित हाउसिंग सोसायटी का यह मामला आवासीय योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े करता है। अब प्रभावित सदस्यों की उम्मीद प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी हुई है, ताकि 15 वर्षों से चला आ रहा इंतजार समाप्त हो सके और उन्हें उनका हक मिल सके।

Sanjay
Author: Sanjay

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