भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 15 अगस्त से प्री-पेड कैशलेस स्मार्ट कार्ड सेवा शुरू करने जा रहा है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अस्पताल में विभिन्न सेवाओं के लिए बार-बार नकद भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी। मरीज स्मार्ट कार्ड के माध्यम से रजिस्ट्रेशन, जांच, दवाइयों और अन्य निर्धारित सेवाओं का भुगतान आसानी से कर सकेंगे। संस्थान का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना और अस्पताल की सेवाओं को अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है।
कैशलेस व्यवस्था से बढ़ेगी मरीजों की सुविधा
नई स्मार्ट कार्ड प्रणाली लागू होने के बाद मरीजों को हर बार नकद राशि लेकर अस्पताल आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कार्ड में पहले से निर्धारित राशि जमा कराई जा सकेगी, जिसका उपयोग अस्पताल की विभिन्न सेवाओं के भुगतान में किया जाएगा। इससे भुगतान प्रक्रिया तेज होगी और लंबी कतारों में लगने का समय भी कम होगा। साथ ही मरीजों और उनके परिजनों को छुट्टे पैसे या नकदी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जांच, दवा और अन्य सेवाओं में होगा उपयोग
प्री-पेड स्मार्ट कार्ड का उपयोग अस्पताल में रजिस्ट्रेशन, पैथोलॉजी जांच, रेडियोलॉजी सेवाओं, दवाइयों और अन्य निर्धारित चिकित्सा सुविधाओं के भुगतान के लिए किया जा सकेगा। मरीज आवश्यकता के अनुसार कार्ड को रिचार्ज भी करा सकेंगे। इससे अलग-अलग काउंटरों पर भुगतान करने की प्रक्रिया सरल और व्यवस्थित हो जाएगी। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था मरीजों के समय की बचत करने के साथ-साथ डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत करेगी।
डिजिटल इंडिया अभियान को मिलेगा बढ़ावा
एम्स भोपाल की यह पहल डिजिटल इंडिया अभियान के अनुरूप मानी जा रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कैशलेस भुगतान प्रणाली से वित्तीय लेनदेन अधिक सुरक्षित और पारदर्शी होगा। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से भुगतान संबंधी जानकारी का बेहतर प्रबंधन भी संभव होगा। इसके अलावा नकदी के लेनदेन में होने वाली त्रुटियों और असुविधाओं को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
15 अगस्त से होगी शुरुआत, मरीजों को मिलेगा लाभ
अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्री-पेड कैशलेस स्मार्ट कार्ड सेवा का शुभारंभ 15 अगस्त से किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक तकनीकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। शुरुआती चरण में मरीजों को कार्ड जारी किए जाएंगे और उन्हें इसके उपयोग की जानकारी भी दी जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि यह नई व्यवस्था अस्पताल में आने वाले हजारों मरीजों के लिए सुविधाजनक साबित होगी और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक आधुनिक, तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी।


