भोपाल। राजधानी भोपाल में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन और दशहरे के आयोजन को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विसर्जन के दौरान घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने के साथ गोताखोरों की 24 घंटे तैनाती की जाएगी। वहीं, दशहरे पर संकरी गलियों में रावण दहन की अनुमति नहीं होगी। इन निर्देशों का उद्देश्य त्योहारों के दौरान होने वाली भीड़ को नियंत्रित करना और किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव करना है।
त्योहारों के दौरान घाटों, पूजा पंडालों और रावण दहन स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और आपात स्थिति से निपटने की तैयारी महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रशासन की गाइडलाइन के तहत आयोजकों और आम नागरिकों से नियमों का पालन करने की अपेक्षा की गई है, ताकि धार्मिक उत्सव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकें।
घाटों पर 24 घंटे तैनात रहेंगे गोताखोर
दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान जलाशयों और घाटों पर सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, घाटों पर गोताखोर 24 घंटे तैनात रहेंगे, ताकि किसी अप्रिय स्थिति में तत्काल मदद उपलब्ध कराई जा सके। विसर्जन के समय श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने के कारण पानी के पास विशेष सतर्कता बरतना जरूरी है। श्रद्धालुओं को निर्धारित विसर्जन स्थलों का उपयोग करने और सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है। बच्चों को पानी के किनारे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। साथ ही, विसर्जन के दौरान जल्दबाजी और असावधानी से बचना जरूरी है। सुरक्षा इंतजामों का प्रभावी संचालन दुर्घटनाओं की आशंका कम करने में मदद कर सकता है।
संकरी गलियों में नहीं होगा रावण दहन
दशहरे के अवसर पर रावण दहन को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। संकरी गलियों में रावण दहन नहीं किया जा सकेगा। ऐसे स्थानों पर भीड़ जुटने, आग फैलने और आपात स्थिति में लोगों के बाहर निकलने में परेशानी होने का खतरा रहता है। रावण दहन के आयोजकों को स्थल का चयन करते समय पर्याप्त खुली जगह और लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखना होगा। आतिशबाजी या आग से जुड़े कार्यक्रमों में सावधानी बरतना भी जरूरी है। नागरिकों से अपेक्षा है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और प्रतिबंधित स्थानों पर आयोजन करने से बचें।
त्योहारों में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने पर जोर
दुर्गा विसर्जन और दशहरे के दौरान भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और आपात सेवाओं की उपलब्धता अहम रहेगी। प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन कराने के लिए संबंधित विभागों और आयोजन समितियों के बीच समन्वय जरूरी होगा। श्रद्धालुओं और आयोजकों की जिम्मेदारी है कि वे सुरक्षा नियमों को गंभीरता से लें। घाटों पर निर्धारित व्यवस्था का पालन करने और सुरक्षित स्थानों पर ही रावण दहन करने से त्योहारों को शांतिपूर्ण ढंग से मनाने में मदद मिलेगी। प्रशासन की ओर से जारी गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य धार्मिक आयोजनों के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दुर्घटनाओं की आशंका को कम करना है।


