सरकारी अस्पताल में 77 वर्षीय वृद्ध के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। वायरल वीडियो में बुजुर्ग को डॉक्टर और एक स्वास्थ्यकर्मी द्वारा अस्पताल से जबरन बाहर खींचते हुए देखा गया था। मामले की जांच के बाद दोषियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया, जबकि अस्पताल अधीक्षक को निलंबित किया गया है।

घटना छतरपुर जिला अस्पताल की है, जहां उधवलाल जोशी नामक वृद्ध अपनी पत्नी के इलाज के लिए पहुंचे थे। गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे, उन्होंने भीड़ के कारण लंबा इंतजार करने के बाद डॉक्टर से जल्दी जांच की विनती की। आरोप है कि इसी बात को लेकर डॉक्टर राजेश मिश्रा और रेडक्रॉस कर्मी राघवेंद्र खरे ने जोशी के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें घसीटते हुए अस्पताल से बाहर निकाल दिया।
डॉक्टर और कर्मी सेवा से बाहर
वीडियो वायरल होने के बाद, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक ने डॉक्टर मिश्रा को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। वहीं, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, छतरपुर द्वारा राघवेंद्र खरे की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
जांच रिपोर्ट में पाया गया कि डॉक्टर ने वृद्ध व्यक्ति और उनकी पत्नी के साथ बदसलूकी की थी, जो मानव संसाधन नियमावली 2025 के अनुच्छेद 11.1 के अंतर्गत गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। रेडक्रॉस कर्मी का जवाब भी असंतोषजनक पाया गया और उसकी बर्खास्तगी को “अक्षम्य” बताया गया।
अस्पताल अधीक्षक निलंबित
घटना के दौरान डॉ. जी.एल. अहिरवार, जो कि अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक थे, को भी अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में विफल मानते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें जिला बालाघाट के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अधीन रखा जाएगा।
दोनों पर दर्ज हुआ मामला
एसपी अगम जैन ने बताया कि डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराएं 115(2), 296(3) और 351 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू की गई है।
इस घटना ने न केवल प्रशासनिक विफलता को उजागर किया है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनशीलता और जवाबदेही की गंभीर कमी को भी रेखांकित किया है।
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